हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

तलाश

मनमानी करते तलाशते आज़ादी और ख़ुशी,
मिलता दुःख दर्द, जंजीरें और रस्सी ,
अरमानों की लम्बी कतार होती,
मन की मुराद कभी पूरी नहीं होती ,
मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी,
पर ख़ास आता जेब में एक दो कौड़ी,
चाहती हर समस्या आसानी से हो हल,
पर भी हाथ लगती कठिनाई और दलदल,
आम मांगने पर मिलता बबूल,
हर दुआ न होती कबूल,
स्ट्रेस ने अंगीकार किया,
उच्च रक्तचाप ने दबोच लिया,
जीवन हरियाली सुख गयी,
बुद्धि की गति रुक गयी ,
मैं ने मुझ को दिया बहुत टेंशन,
तब याद आयी तेरी और तुझ पर हुआ अटेंशन,
मेरी हर बात जो कही होती अनकही,
तब हार कर सोचा अपना न सही तेरी सुनो तो सही,
रही न कोई बात मुझ मे जो अकड़ू,
तब थक कर तय किया कि अब तेरी राह पकडू ,
पथ पर पेहेले कालीन फिर काटें मिले,
लेकिन हम न हिले और आगे चले,
फिर क्या था अब हर अनकही भी सुनता है कोई,
अब हम वही माहोल वही,
पर हर एक पल बदल सी गयी,
अब सोचने की है देरी,
हर ख्वाइश होती है पूरी,
चाहते हम हैं करते हो तुम,
वह भी खामोश और गुमसुम,
तम्मनाओं को हकीकत अपने आप होते देख कर होता है ताज्जुब,
खुस होते कहते हैं लाजवाब हो तुम बहुत खूब !
यह कैसा करिश्मा है समझ में नहीं आता है,
अब तेरी तलाश करने के सिवाय और कुछ नहीं भाता है.
रंजना ओली

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