हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

दुर्लभ होते हैं सतगुरु

सुन्दरसाथजी आप सबके चरण कमल में प्रेम प्रणाम।
वाणी का कथन सर्वोपरि है यह वाणी सत्य है तब इसको माने नहीं तो मन मानी करें आप का जीवन आपका विश्वास।

मरने के बाद क्या होगा यह विश्वास के ऊपर है। धर्म शास्त्र आत्मा (रूह), परमात्मा (ख़ुदा) , परमधाम (अरश), नरक(दोज़ख) की बात करती है। सरीर मरता है आत्मा नहीं कहती है और इस संसार में किये हुए कर्मों के फल की बात करती है।
सभी यह सुनते हैं। कुछ अपने कर्म की और ध्यान देते हैं और अच्छे कर्म करते हैं। कुछ सत्य की खोज करते हैं और परम तत्व को पातें हैं। यह लोग फिर संसार में शीतलता लाने के लिए निस्स्वार्थ भाव से कार्य करते है ऐसे लोगों को सच्चे संत कहते हैं।
कुछ लोग भय भीत होते हैं लेकिन आचरण बदल नहीं सकते ऐसे लोग इधर उधर चमत्कारी को ढूंढ़ते हैं जो इनके पाप के घड़े को शुद्ध कर दे और ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा होती है फिर कुछ ऐसे लोग होतें हैं जिनको न भय और ना ही विश्वास होता है ऐसे लोग ज्ञानी साधू संत बाबा बापू एक इमेज बनाकर आते हैं और भयभीत भक्तो के लिए मार्ग तैयार करते हैं। अब यह अपना उल्लू साधने आये हैं इनको सत्य से कोई वास्ता नहीं होता। यह लोग धर्म में जब आते हैं तब सबसे पेहेले वह अपना स्वार्थ की सिद्धि के लिए गफ़लत पैदा करेंगे, अपने आप को बड़ा और दूसरों को गलत कहेंगे इनका किसी भी ग्रन्थ पर ईमान नहीं होता और जो कोई एक ग्रन्थ यह लेंगे उसका भी अपने हिसाब से गलत अर्थ करेंगे या बदल देंगे और थोथा गुरु बन कर मठ मंदिर निर्माण करेंगे और धर्म के नाम पर लोगों में फुट डालेंगे। ऐसे करने वाले सभी को लगता है की वह मन मानी कर सकते हैं और कुछ भी नहीं होगा। इनमे ईमान और विश्वास दो चीज़े नहीं होती हैं लेकिन यह दोनो दूसरों पर थोपेंगे और खुद को परमात्मा घोसित करेंगे और अपनी पूजा कराएंगे। झूठी दुनिया में झूठे पाखंडी बहुत मिलेंगे। ऐसे लोगों के चेलें चपेटे फिर और लोगों को ठुड़ेंगे और यही सत्य है कहेंगे। अगर आप लोग समाचार पढ़ रहे हो तब आप को पता चलेगा नित्यानंद और आसाराम बापू उसके पुत्र इसी मार्ग पर थे वे सच्चे साधू नहीं थे लेकिन बात तो परमात्मा और सत्य आचरण की ही करते थे। यह लोगों को भगवान और उनसे मिलने की तकनीक बताते और खुद हजारों करोड़ों रुपये कमाते फिर दुराचार करते स्वयं को ही भगवान कहते।

ऐसी दुनिया में दुर्लभ होते हैं सतगुरु। हमारे बड़े भाग्य से हमें सत्य धर्म सत्य गुरु धनि देवचन्द्रजी और महामति प्राणनाथजी मिले हैं।
कुलजमस्वरूप साहेब सत्य वाणी है यह हमें सतगुरु हादी जो ब्रह्म की आनंद स्वरुप श्यामा रूहल्लाह है उन्होंने दिया है यह सत्य वाणी है इसका ही मंथन करें जो मूल वचन उन्होंने दिया है उसीको ग्रहण करें । जो इस सत वाणी को जो बदलता है, हादी सतगुरु के एक दीन के सपने को तोड़ता है, सुन्दरसाथ के एकता को छिन्न भिन्न करता है , वह एक फरेबी है, एक झूठा पाखंडी है इसके पीछे लगेंगे तब दोज़ख में जलना पडेगा और पुलसीरात के धार में कटना पडेगा।

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