हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

तारतम ज्ञान की साक्षी श्री कृष्ण श्याम ने आड़ीका लीला द्वारा

जागनी ब्रह्माण्ड में श्यामा वर श्याम सुन्दर जो परमधाम के धनि हैं प्रगट हुए उन्होंने अपना निज का नाम श्री कृष्ण और वह पूर्ण ब्रह्म हैं कहा और अक्षरातीत परमधाम अनादि है कहा और ब्रह्म सृष्टि और ब्रह्म वतन प्रगट किया जाहेर किया। और ब्रज रास में श्री कृष्ण की जो लीला हुई वह अक्षरातीत पूर्ण ब्रह्म श्री कृष्ण ने अपने ही ब्रह्म आत्माओं के संग खेला है यह भी जाहेर किया वह लीला अक्षर ने देखा और उनकी अक्षरातीत श्री कृष्ण पूर्ण ब्रह्म परमात्मा की लीला देखने की मनोरथ पूर्ण हुयी।
सुन्दरसाथ जी धनि देवचन्द्र जी को धाम धनि प्रगट होकर निजनाम श्री कृष्ण जी कहा और क्षर, अक्षर, अक्षरातीत का सम्पूर्ण ज्ञान देकर उनके ह्रदय में बस गए। यह सारी बात उन्होंने गांगजीभाई को सुनायी। गांगजी भाई ने धनि देव चन्द्र जी की तारतम ज्ञान सुना, बहुत सारे प्रश्न भी पूछे, शास्त्र प्रमाण के साथ उत्तर पाने पर उन्होंने सतगुरु को धाम के धनि के रूप में पहचाना और सेवा करने लगे , सतगुरु ने कहा हमें अब सुन्दरसाथ को जगाना है मैं यही काम करने आया हूँ तब उनको बहुत आश्चर्य हुआ और पूछने लगे यह सारा ब्रह्माण्ड ही तीन गुण, मोह और अहंकार का बना है फिर उस पर काम क्रोध लोभ मोह, ईर्षा, द्वेष की यहाँ लहरे उठती हैं और ऐसे में कोई सीधा खड़ा हो नहीं सकता तब आप के वचन तो बेहद से पार अक्षर उसके पार अक्षरातीत की हैं यह हद का संसार कैसे समझेंगे और मानेंगे ? ब्रह्मात्माओं ने भी मोह का वेश धर रखा है उनको कैसे ढूंढ निकालेंगे। तब सतगुरु कहते हैं कि धाम धनि ने उत्तम बंदोबस्त किया है जो मेरे वचन पर चिंतन करेगा उसको धामधनी प्रत्यक्ष प्रगट होकर प्रमाण देंगे। सुन्दरसाथ के साथ धनि भोजन ग्रहण करेंगे, फिर जागी हुयी सखी दूसरी सखी का हाथ पकड़ कर धनि दिखायेगी फिर धीरे धीरे इसका विस्तार होगा।
धनि देवचन्द्रजी ने तारतम ल्याए और निजानंद की निधि दी है, धाम धनि ने प्रत्यक्ष प्रगट होकर प्रमाण भी दिया है जिससे किसी को शंका न हो। यही तारतम महामति प्राणनाथ जी ने लिया और उनके आगे के सुन्दरसाथ जी ने यही तारतम ग्रहण किया उनके प्रमुख चेले सकुंडल वासना छत्रसाल महाराज हैं। यह धाम की कुंजी श्यामा ने ब्रह्मात्माओं के लिए लायी हैं यही ब्रह्मात्माओं की निधि है।
श्यामा के वर सत्य है, यही सदा सुख दे सकते हैं। यह किसी भी तरह से असत्य नहीं बोलेंगे।
बदली हुयी नकली कुंजी, फरेबी पाखंडी अगुआओं से बचिए यह मानव चोला सत्य की प्राप्ति के लिए है।

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