हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

स्यामा स्याम, मेरा साहेब नूरजमाल

स्यामा स्याम, मेरा साहेब नूरजमाल
फुरमान ल्याया दूसरा, जाको सुकजी नाम।
दै तारतम ग्वाही ब्रह्मसृष्ट की, जो उतरी अव्वल से धाम।।५
तारतम ज्ञानकी दूसरी भी साक्षी है, उसे लेकर शुकदेवमुनि अवतरित हुए हैं.उन्होंने भी परमधामसे अवतरित हुई ब्रह्मआत्माओं तथा तारतम ज्ञानकी साक्षी दी है.
खिलवत खाना अरसका, बैठे बीच तखत स्यामा स्याम।
मस्ती दीजे अपनी, ज्यों गलित होऊं याही ठाम।।६
परमधाम रङ्ग भवनकी एकान्त स्थली मूलमिलावाके सिंहासन पर श्यामश्यामाजी विराजमान हैं. हे धनी! आप मुझे प्रेमकी ऐसी मस्ती प्रदान करें जिससे मैं आपके श्रीचरणोंमें तल्लीन हो जाऊँ.
बाधीं पाग समार के, हाथ नरम उजल लाल।
इन पाग की सोभा क्यों कहूं, मेरा साहेब नूरजमाल।।५२
श्याम श्रीराजजीने अपने लालिमायुक्त उज्ज्वल हाथोंसे सुव्यवस्थित ढँग से पाग बाँधी है. इस पागकी शोभाका वर्णन कैसे हो सकता है, जिसको स्वयं मेरे साहेब धनी श्याम श्रीराजजीने बाँधी है.
प्रकरण ८ सागर

महामति प्राणनाथ वाणी चिंतन और मंथन
गिरो बचाई साहेब ने, तले कोहतूर हूद तोफान ।
बेर दूजी किस्ती पर, चढाए उबारी सुभान।।१२

इसी व्रज मण्डलमें इन्द्रकोपके समय श्रीकृष्णजीने ब्रह्मात्माओंको गोवर्धन पर्वतके नीचे सुरक्षित रखा था. इस प्रसङ्गको कुरानमें हूद तूफान कहा गया है. उस समय हूद पैगम्बरने अपने समुदायके लोगोंको कोहतूर पर्वतके नीचे सुरक्षित रखा था. दूसरी बार नूह तूफानके समय भी उन्होंने ही योगमायाकी नावमें चढ.ाकर उन्हें पार किया था.

प्रकरण १ छोटा क़यामतनामा

सब साहेदी दै जो हदीसों, और अल्ला कलाम ।
सो साहेदी ले पीछा रहे, तिन सिर रसूल न स्याम ।।77

जब कुरान, हदीस आदि कतेब ग्रन्थ तथा परब्रह्म परमात्माके वचन तारतम ज्ञाानने साक्षी दे दी है तो इस साक्षीको लेकर भी जो आत्माएँ स्वयं सर्मिपत होनेमें पीछे रहेंगी उन्हें सद्गुरु तथा परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्णका संरक्षण प्राप्त नहीं होगा.
All the proofs and witnesses from Hadish, Quran and the words of the Lord Allah Kalaam is given in the tartamsagar(Kuljamswaroopr), taking these witnesses those who stay behind and do not surrender themselves to Lord will be blessed by neither the Rasool(satguru) nor Shyam. Those who do not believe these words cannot be saved by the Satguru or Shyam.
श्री कयामतनामा (छोटा) प्रकरण १

अपनी जुदाई दुनी से, किया चाहिए जहूर ।
दोऊ एक राह क्यों चलें, वह अंधेरी यह नूर।।११२
ब्रह्मात्माओंको निश्चय ही नश्वर जगतसे विरक्ति होनी चाहिए. नश्वर जगतके जीव एवं ब्रह्मात्माएँ एक ही मार्ग पर कैसे चल सकतीं हैं ? वे अन्धकारपूर्ण जगतसे उत्पन्न हैं एवं ब्रह्मात्माएँ दिव्य परमधामके चिन्मय स्वरूप हैं.
Our ways must be different from the worldly. Both cannot walk the same path, one leads to darkness (suffering) the other to the enlightening.
महामत कहें सुनो मोमनों, मेहेर हककी आपन पर ।
सब अंगों देखो तुम, तब खुले रूह नजर ।।११३
महामति कहते हैं, हे ब्रह्मात्माओ ! सुनो, हम पर धामधनीकी अपार कृपा है. जब तुम उनकी कृपाको अपने अङ्ग-प्रत्यङ्गमें देखने लगोगी तब तुम्हारी आत्मदृष्टि खुल जाएगी.
Mahamati Prannath says, O celestial souls, Lord has bestowed grace upon us. When you see the self (Soul) then the eye of the soul will be opened. When you become soul conscious then you will see from eye of the soul.
श्री कयामतनामा (छोटा) प्रकरण १
साहेब के संसार में, आए तीन सरूप।
सो कुरान यों केहेवही, सुंदर रूप अनूप।।7१

कुरानमें इस प्रकार कहा है कि इस संसारमें परब्रह्म परमात्मा तीन स्वरूपमें प्रकट हुए. जिनके सुन्दर स्वरूपकी उपमा नहीं दी जा सकती.
In Holy Quran it is mentioned the Master in the universe came in three forms whose beauty cannot be described.

एक बाल दूजा किसोर, तीसरा बुढापन।
सुंदरता सुग्यान की, बढत जात अति घन।।7२

परमात्माके इन तीन स्वरूपोंमें एक बालस्वरूप (व्रजलीला) दूसरे किशोर स्वरूप (रासलीला) तीसरे प्रौढस्वरूप (जागनी लीला) कहे गए हैं. उन स्वरूपोंमें ज्ञाानकी सुन्दरता उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है.
One as a child, another as youth and third as an adult. There is extreme rise in beauty and wisdom continuously.

ज्यों चढती अवस्था, बाल किसोर बुढापन।
यों बुध जागृत नूर की, भई अधिक जोत रोसन।।7३

जिस प्रकार बाल, किशोर और प्रौढ ये तीनों अवस्था उत्तरोत्तर विकसित होती हैं उसी प्रकार अक्षर ब्रह्मकी जागृत बुद्धिका प्रकाश भी इन तीनोंमें क्रमशः बढ.ता रहा है.
As there was rise in state from child, youth and adult there was great rise in brillance of the intelligence, awakening and enlightening.

ए केहेती हूं प्रगट, ज्यों रहे ना संसे किन।
खोल माएने मगज मुसाफ के, सब भांने विकल्प मन।।7४

मैंने इसलिए स्पष्टता की है कि जिससे किसीके मनमें लेशमात्र भी संशय न रहे. इस प्रकार कुरानके रहस्योंको स्पष्टकर सबके मनके सङ्कल्प-विकल्पोंको दूर कर दिया है.
This I am revealing you so you must not have any doubts. I have clarified the mystery of holy Quran and ended all the confusion and given the true solution.

श्री कृस्नजीएं व्रजरास में, पूरे ब्रह्मसृष्ट मन काम।
सोई सरूप ल्याया फुरमान, तब रसूल केहेलाया स्याम।।7५

श्रीकृष्णजीने व्रज और रासकी लीलामें ब्रह्मात्माओंकी मनोकामनाएँ पूर्ण कीं. वही स्वरूप कुरानका सन्देश लेकर आया है तब वे ही श्याम रसूल मुहम्मद कहलाए.
Shri Krishna in Braj Raas who fulfilled the wishes of BrahmShristi, it is the same form of the self(soul)(swa means self roop means form) brought the messages then Rasool Mohamad was called Shyam.

चौथा सरूप ईसा रूहअल्ला, ल्याए किल्ली हकीकत धाम।
पांचमा सरूप निज बुधका, खोल माएने भए इमाम।।7६

श्रीकृष्णजीका चतुर्थ स्वरूप श्री देवचन्द्रजी (ईसा रूहअल्लाह) का है जो परमधामकी यथार्थता स्पष्ट करने वाले तारतम ज्ञाानरूपी कुञ्जी लेकर प्रकट हुए हैं. पाँचवाँ स्वरूप निष्कलङ्क बुद्धका है जो वेद-कतेबके गूढ. रहस्योंको स्पष्ट कर इमाम महदी कहलाए.
Fourth form of the soul(swaroop) is of Isa(second Christ) Roohallah (Shyama) Devachandraji who brought the key of reality of the supreme abode (Nijnaam mantra). The fifth form of the soul is the intelligence of the Self, which revealed the mysteries of holy Quran and thus became Imam Mehadi.

ए भी पांच सरूप का, है बेवरा माहें कुरान।
जो कछू लिख्या भागवत में, सोई साख फुरमान।।77

इन पाँचों स्वरूपोंका विवरण भी कुरानमें दिया गया है. श्रीमद्बागवतमें जिस प्रकारका उल्लेख है उसकी साक्षी कुरानमें दी गई है.
These are the five form of the soul (Shri Krishna Shyam) details given in holy Quran. Whatever is written in Bhagavat the same is witnesses the message of holy Quran.
प्रकरण १३ khulasa

जो ब्रह्मात्मा हैं वह धनि देवचन्द्र जी निर्दिष्ट मार्ग पर अद्वैत भाव से चलती हैं
मोमिन गुसल हौज कौसर, माहें ईसा मेहेदी महंमद।
पकडें एक वाहेदत को, और करें सब रद।।८०
ब्रह्ममुनि हौज कौसरमें स्नान करते हैं, इनके साथ ईसा महदी मुहम्मद हैं, इन्होंने एक ही अद्वैत भावको अपने हृदयमें धारण कर शेष सभीको निरस्त कर दिया है. जो ब्रह्मात्मा हैं ईसा का अनुशरण कर और बांकी सभी रद्द करते हैं.
छत्ते आगा लिया इन समें, जब दोऊ से लागी जंग ।
हुकम लिया सिर यकीन, छोड दुनी का संग।।१०१
ऐसे समयमें महाराजा छत्रसाल अग्रसर हुए जब दोनों (हिन्दू और मुसलमानों) से संघर्ष छिड़ा हुआ था. उन्होंने सांसारिक आसक्तिको छोड.कर मेरा आदेश विश्वास पूर्वक शिरोधार्य किया. किया खुलासा जाहेर, ले बेसक हक इलम।
दिया महंमद मेहेदीने, गिरो मोमिनों हाथ हुकम।।१०२
सभी सन्देहोंको मिटाने वाले ब्रह्मज्ञान-तारतमज्ञानके द्वारा इस प्रकार सद्गुरुने (मेरे हृदयमें बैठकर) कुरानके रहस्योंका स्पष्टीकरण करवाया तथा ब्रह्मात्माओंकी जागनीका सम्पूर्ण दायित्व मुझे सौंप दिया. प्रकरण १ श्री खुलासा
किन तरफ न पाई अरस हक की, माहें चौदे तबक।
सो खोल दिए पट हादिएं, इलम ईसा के बेसक।।५२
चौदह लोकोंके जीवोंमें किसीको भी परमधामका मार्ग नहीं मिला था. निजानन्द स्वामी सद्गुरु श्री देवचन्द्रजीने भ्रान्ति निवारक तारतम ज्ञाानके द्वारा अज्ञाानका आवरण दूर कर परमधामका मार्ग प्रशस्त किया.

लिख्या दरिया नींद इसारतें, जो देखाई कर मेहेरबानगी।
मोहे रूह अल्ला पट खोलिया, दई महंमदे म्याराज में साहेदी।।६२
कुरानमें इस प्रकारका भी सङ्केत है कि यह मोहसागर नींदका समुद्र है, जिसे धामधनीने हम ब्रह्मात्माओंको कृपापूर्वक दिखाया है. इसमें भी सद्गुरु श्री देवचन्द्रजी महाराजने आकर (तारतम ज्ञानके द्वारा) मेरे हृदयसे मोहका आवरण दूर कर दिया है. इस प्रकारकी साक्षी भी रसूल मुहम्मदने म्याराजके प्रसङ्गमें दी है.
प्रकरण ३ खुलासा
महामति प्राणनाथ वाणी चिंतन और मंथन

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