हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

कृपानिध सुंदरवर स्याम, भले भले सुंदरवर स्याम

कृपानिध सुंदरवर स्याम, भले भले सुंदरवर स्याम।
उपज्यो सुख संसार में, आए धनी श्री धाम।।१
श्री श्यामाजीके वर श्याम-श्रीराजजी कृपाके सागर तथा अत्यन्त सुन्दर हैं. धामके धनीके प्रकट होने पर संसारमें अखण्ड सुखका उदय हुआ.
प्रगटे पूरन ब्रह्म सकल में, ब्रह्म सृष्टि सिरदार।
ईस्वरी सृष्टि और जीव की, सब आए करो दीदार।।२
ब्रह्मसृष्टियोंकी शिरोमणि श्यामाजी पूर्णब्रह्मका आवेश लेकर इस संसारमें सद्गुरुके रूप (सकल)में पधारी हैं. ईश्वरीसृष्टि एवं जीवसृष्टि सभी आकर उनके दर्शन करें.
बैठते उठते चलते, सुपन सोवत जागृत।
खाते पीते खेलते, सुख लीजे सब विध इत।।१६
इसलिए बैठते, उठते, चलते, फिरते, खाते, पीते, हँसते-खेलते, स्वप्नमें तथा जागृतिमें भी तुम यहाँ पर परमधामके उन सुखोंका अनुभव करती रहो.
एह बल जब तुम किया, तब अलबत बल सुख धाम ।
अरस परस जब यों हुआ, तब सुख देवें स्यामा स्याम ।।१७
इसके लिए यदि तुमने साहस किया तो तुम्हें निश्चय ही परमधामके अखण्ड सुखोंका अनुभव होने लगेगा. इस प्रकार जब आत्मा और पर-आत्मामें सुखोंका आदान-प्रदान होगा तब श्यामश्यामाजी तुम्हें अखण्ड सुखका अनुभव करवाएँगे.
प्रकरण ४ परिक्रमा महामति प्राणनाथ वाणी चिंतन और मंथन

मैं आग देऊं तिन सुख को, जो आडी करे जाते धाम ।
मैं पिंड न देखूं ब्रह्मांड, मेरे हिरदें बसे स्यामा स्याम ।।१०श्री परिक्रमा

परमधाम जाते हुए जो सुख मुझे बाधा डालते हैं, मैं उन सुखोंको प्रियतमके विरहकी आगमें जला देता हूँ. अब मुझे इस झूठे शरीर या झूठे ब्रह्माण्डकी ओर नहीं देखना है, क्योंकि मेरे हृदयमें तो अब श्यामा-श्याम ही बस गए हैं.
I will burn those pleasure/happiness which obstructs my path to the supreme abode(paramdham). This false body and the false universe I have no interest to see because in my heart resides ShyamShyam!

Brahmshriti and Brahm are one! Awakening means becoming conscious that we are soul and we one with the Supreme. In body consciousness we are separate entity but in soul consciousness we all are one.
ब्रह्म इसक एक संग, सो तो बसत वतन अभंग ।
ब्रह्म सृष्टि ब्रह्म एक अंग, ए सदा आनंद अति रंग ।।२

ब्रह्म और प्रेम दोनों एक साथ हैं तथा दोनों अखण्ड परमधाममें रहते हैं. ब्रह्मसृष्टि और परब्रह्म भी अङ्ग-अङ्गीभावसे रहते हैं तथा सदा आनन्दके रङ्गमें रङ्गे हुए हैं.
The Supreme Brahm and the love are together, which reside in the original abode which are indestructible(whole, imperishable, indivisible), soul of brahm and the Suprem Brahm are one soul, here there is eternal bliss of extreme colours (everlasting bliss but with freshness, novelty, variety and intensity).
इन्द्रावतीसुं अतंत रंगे, स्याम समागम थयो।
साथ भेलो जगववा, इन्द्रावतीने में कह्यो।।१३५ प्रकरण १२ श्री कलस (गुजराती)
इन्द्रावतीकी अन्तरात्मामें धामधनी स्याम का समागम हो गया है. सद्गुरु कहते थे कि समस्त ब्रह्मसृष्टिको एकसाथ जागृत करनेके लिए मैंने इन्द्रावतीसे कहा है अर्थात् जागनीका उत्तरदायित्व इन्द्रावतीको सौंपा है.
महंमद आया ईसे मिने, तब अहंमद हुआ स्याम।
अहंमद मिल्या मेहेदी मिने, ए तीन मिल हुए इमाम।।२१ प्रकरण १५ श्री खुलासा
कुरानके अनुसार रसूल मुहम्मदमें विद्यमान ब्राह्मीशक्ति जब ईसा रूहअल्लाह श्री देवचन्द्रजीमें प्रविष्ट होती है तब वे अहमद स्वरूप कहलाते हैं. जब ये अहमद स्वरूप महदीमें प्रविष्ट होते हैं तब ये तीनों स्वरूप एक होकर इमाम कहलाते हैं.
फेर आए रसूल स्याम मिल, सोई फेर आए यार ।
देख निसबत पांचों दुनीमें, क्यों छोडें असल अरस प्यार ।।३५
अब पुनः रसूल मुहम्मद श्यामसुन्दर श्रीकृष्णके साथ मिलकर मेरे हृदयमें अवतरित हुए हैं. श्रीश्यामाजीकी अङ्गस्वरूपा ब्रह्मात्माएँ भी इस जगतमें पुनः अवतरित हुइंर् हैं. इस नश्वर जगतमें भी पाँचों शक्तियों (श्रीधनीजीका जोश, श्रीश्यामजीकी आत्मा, अक्षरकी बुद्धि, श्रीराजजीका आदेश, परमधामकी मूलबुद्धि तारतम ज्ञान) को एक साथ सम्मिलित देख कर ब्रह्मात्माएँ अपने मूल स्नेहको कैसे छोड. सकतीं हैं ? प्रकरण १ श्री कयामतनामा(छोटा) महामति प्राणनाथ वाणी चिंतन और मंथन

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