हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

नाम निसान जाहेर करूं, ज्यों समझे सब कोए

बोली सबों जुदी परी, नाम जुदे धरे सबन।
चलन जुदा कर दिया, ताथें समझ ना परी किन।।४३

सबकी भाषाएँ भिन्न-भिन्न होनेके कारण उन्होंने परमात्माके नाम भी अलग-अलग रख दिए हैं. इस प्रकार आचरण तथा पूजा-पद्धति भी भिन्न प्रकारकी बनाई गई है. इसीलिए किसीको भी यथार्थ समझमें नहीं आया.
The language is different and the terminology is also different and their rituals are different hence they could not understand the reality.

ताथें हुई बडी उरझन, सो सुरझाउं दोए।
नाम निसान जाहेर करूं, ज्यों समझे सब कोए।।४४

इसलिए दोनोंमें परस्पर बड.ी उलझनें खड.ी हो गई. अब मैं उन दोनोंकी उलझनोंको सुलझा देता हूँ. वेद तथा कतेबोंमें परमात्माके लिए प्रयोग किए हुए नाम तथा सङ्केतोंको स्पष्ट कर देता हूँ जिससे सभी लोग यह रहस्य समझ सकें.
That is why was lots of confusion and conflict between them that I will the conflict between them. I will reveal the name,signs and symbols and explain it to everyone to make them understand.

विस्नु अजाजील फिरस्ता, ब्रह्मा मेकाईल।
जबराईल जोस धनीय का, रुद्र तामस अजराईल।।४५

कुरानमें भगवान विष्णुको अजाजील फरिश्ता तथा ब्रह्माजीको मेकाईल फरिश्ता कहा है. इसी प्रकार दुनियांको जोश प्रदान करने वाले फरिस्ताको जिब्रील एवं तामस स्वरूप रुद्रको इजराईल कहा है.
Vishnu is Ajajeel angel(firasta) and Brahma is the Mekail(firasta), Jabrail (inspiration of Lord- Josh Dhanidhaam), Rudra(Shankar) is the Azrail.

बुध ब्रह्मा मन नारद, मिल व्यासें बांधे करम।
ए सरीयत है वेद की, जासों परे सब भरम।।४६

बुद्धिरूप ब्रह्माजीने मनरूप नारदजीके साथ मिलकर व्यासजीके द्वारा विभिन्न शास्त्रोंकी रचना करवाई और कर्मोंके बन्धन बाँध दिए. इसीको वैदिक कर्मकाण्ड कहा जाने लगा जिसके बन्धनमें बँधकर सभी लोग भ्रमित हो रहे हैं.
The intelligence (Budh) is Brahma, mind(man) is Narad and along with Vyas(who wrote various hindu scriptures) created various bondage of Karma(action) and this is the rituals (discipline) from the Ved and because of which all are in the state of confusion(cannot find truth and reality)!

वेदें नारद कह्यो मन विस्नुको, जाको सराप्यो प्रजापत।
राह ब्रह्म की भांन के, सबों विस्नु बतावत।।४७

वैदिक धर्मग्रन्थोंमें नारदमुनिको भगवान विष्णुके मनका स्वरूप माना है. जिनको प्रजापति (ब्रह्माजी) ने श्राप दिया था. इसलिए नारद सदृश अस्थिर मन परमात्माके मार्गसे साधकोंको विचलित कर भगवान विष्णुकी ही श्रेष्ठता दर्शाता है.
Ved has said the Narad is the mind of Vishnu who is cursed by Prajapati. The cursed mind(which is never stable) destracts everyone from the Lord and tells them to worship Lord Vishnu.

दम इबलीस अजाजील को, जाए कुरानें कही लानत।
सो बैठ दुनी के दिल पर, चलावे सरीयत।।४८

कतेब ग्रन्थोंमें भी इबलीस (मन) को अजाजीलका प्राणभूत मानकर धिक्कारा गया है. वही संसारके लोगोंके अन्तःकरण पर बैठकर उनको कर्मकाण्डकी ओर प्रेरित करता है.
Iblish -mind of the Ajaajeel is condemned in the holy Quran. That residing in the heart of worldly people distrancts them to perform the rituals only(sariyat).

अजाजील दम सब दिलों, बैठा इबलीस ले लानत।
बीच तौहीद राह छुडाए के, दांएं बांएं बतावत।।४९

इस प्रकार धिक्कारा गया अजाजीलका प्राणस्वरूप मन (इबलीस) संसारके जीवोंके अन्तःकरणमें बैठा हुआ है और सभीको अद्वैतके मार्गसे विचलित कर यत्रतत्र (दायें बायें) भ्रमित करता है.
Thus the condemned power of Ajajeel the Iblish is ruling the heart of the worldly people and distracts them the true path of One supreme Lord and creates lots of confusion.

सोई इबलीस सबन के, दिल पर हुआ पातसाह।
एही दुसमन दुनी का, जिन मारी सबों की राह।।५०

वही श्रापित इबलीस सबके हृदयका अधिपति बना हुआ है. वस्तुतः यह संसारके सभी प्राणियोंका शत्रु है जिसने सभीका सन्मार्ग अवरुद्ध कर दिया है.
This very Iblish in everyone became the ruler of the heart and this is the enemy of all the people which distracts them from the true path.

मलकूत कह्या वैकुंठ को, मोहतत्व अंधेरी पाल।
अक्षर को नूर जलाल, अक्षरातीत नूरजमाल।।५१

कुरानमें वैकुण्ठ धामको मलकूत तथा मोहतत्त्वको अन्धेरी पाल कहा है. इसी प्रकार अक्षरब्रह्मको नूरजलाल एवं अक्षरातीतको नूरजमाल कहा है.
Malkoot is the baikunth and Mohtatva(element of forgetfulness, attachment and unconsciousness) is the dark (paal) cave . Akshar is the Noor Jalal and Aksharateet is the Noorjamal.
ब्रह्मसृष्टि कहे मोमिन को, कुमारका फिरस्ते नाम। ठौर अक्षर सदरतुल मुंतहा, अरस उल अजीम सो धाम।।५२
ब्रह्मसृष्टियोंको वहाँ पर मोमिन कहा है तथा ईश्वरीसृष्टिको फरिश्ता नाम दिया है. इसी प्रकार अक्षरधामको सदरतुलमुन्तहा एवं परमधामको अरश ए अजीम कहा है.
Brahmashristhi are said as Momin and Kumarika are the firaste as named.
The abode of Akshar is Sadartul Muntaha and the Arash Ul Ajeem is the Paramdham.
श्रीठकुरानीजी रूहअल्ला, महंमद श्रीकृस्नजी स्याम। सखियां रूहें दरगाह की, सुरत अक्षर फिरस्ते नाम।।५३
इसी प्रकार श्रीठकुराणीजीको रूहअल्लाह एवं श्यामसुन्दर श्रीकृष्णजीको मुहम्मद कहा है तथा ब्रह्मात्माओंको दरगाहकी रूह एवं अक्षरब्रह्मकी सुरताको फरिश्ता नाम दिया है.
Shri Thakuranijee (Shyama) is the RoohAllah and Mahamad Shri Krishna Shyam.
All the sakhiyan(celestial souls) are the souls of Dargaah and the astral body of Akshar(Noor Jalal) is the named firaste.
बुधजीको असराफील, बिजिया अभिनंद इमाम। उरझे सब बोली मिने, वास्ते जुदे नाम।।५४
अक्षरकी बुद्धिको इस्राफील तथा विजयाभिनन्दको इमाम महदीकी संज्ञाा दी है. इस प्रकार वेद तथा कतेबोंमें दिए गए भिन्न-भिन्न नामोंको लेकर सभी लोग अपनी-अपनी भाषामें ही उलझें हुए हैं.
The intelligence of Akshar(Noor Jalal) is Asrafeel and Vijayabhinandan Kalki avatar is the Imam Mehadi. All are confused because of the different language and the different name.
वाकी तो वेद कतेब, दोऊ देत हैं साख। अंदर दोऊ के गफलत, लडत वास्ते भाख।।५५
अन्यथा वेद-कतेब दोनों एक ही परमात्माकी साक्षी दे रहे हैं. किन्तु उन दोनोंको मानने वाले हिन्दू तथा मुसलमान दोनोंके अन्दर अज्ञानरूप अन्धकार भरा हुआ होनेसे दोनों ही भाषा भेदके कारण परस्पर लड. रहे हैं.
Rest if you check the Ved and the holy Quran both are giving the witness of the same Lord. There is confusion and darkness of ignorance present in both community are fighting because of the difference in language.

प्रकरण १२ श्री खुलासा महामति प्राणनाथ वाणी चिंतन और मंथन

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