हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

सही नाम दियो मोहोर अपनी

मोहे अपनों सब दियो, रही न कोई सक। सही नाम दियो मोहोर अपनी, कर रोसन थापी हक ।। १८ प्रकरण ६१ श्री किरन्तन महामति प्राणनाथ वाणी चिंतन और मंथन हे धनी ! आपने अपनी सारी विशेषताएँ मुझे प्रदान कीं, इसमें कोई सन्देह नहीं रहा. इतना ही नहीं, आपने तो अपने नामकी सही और सिक्का प्रदान कर परमात्माके रूपमें प्रकाशित किया.

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