हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

सब कौल किताबों के, हक हुकमें किए पूरन

सभी वादे महामति प्राणनाथ ने पूर्ण कर दिए हैं.
कुछ लोग जिव्हा -मूहं से तो कहते हैं कि हम वाणी पर विश्वास रखते हैं फिर प्रमाण देने पर मुकर जाते हैं और आत्मसात नहीं करते ऊपर से "रास प्रकाश कलश से आगे बढ़ो" कहकर सुन्दरसाथ पर ताने कसते रहते हैं। श्री कुलजम स्वरुप साहेब में ऐसे लोगों के लिए चेतावनी दी है। और यह रास प्रकाश से आगे बढ़ने पर ही आप लोगों को यह चौपाई मिलेगी।

For those who keep saying Raas, Prakash and Kalash are not complete and does not holds truth or are sarcastic to sundarsath about these books and try to lead sundarsath away from it Check what Mahamati Prannath has warned for those.

ले ग्वाही दोऊ हादियों की, किया हक वरनन।
सब कौल किताबों के, हक हुकमें किए पूरन।।३५

सद्गुरु श्रीदेवचन्द्रजी एवं रसूल मुहम्मद दोनोंकी साक्षी लेकर मैंने परमात्माके स्वरूपका वर्णन किया है. श्रीराजजीके आदेशने ही सभी आप्त ग्रन्थोंमें दिए गए वचन पूर्ण किए हैं.

Keeping witness both Hadi (sadguru Devachandraji and Rasool Mohamad), I have described the Lord. All the promises in all the scriptures, thus Lord fulfilled completely.
प्रकरण ३ Shri Singaar

Shri Krishna and our supreme abode is essence of Tartam, no one must doubt this (accepting these words without doubt in mind will bring the light which is infinite)

घर श्री धाम अने श्रीक्रस्न, ए फल सार तणो तारतम।
तारतमे अजवालुं अति थाए, आसंका नव रहे मन मांहे।।२३

हमारा घर अखण्ड परमधाम तथा हमारे धनी श्रीकृष्ण यही तारतमका सार फल है. इस तारतम ज्ञाान द्वारा अत्यन्त प्रकाश फैलता
है. जिससे मनमें किसी भी प्रकारकी शंका नहीं रहती है.
Our real home is Paramdham and Shri Krishna, this is the extract of the fruit of Tartam. The light of this Tartam is so much not a doubt should you have in mind. One must believe this without creating confusion and doubts in the mind. No matter for whom this message is meant for (Jeev or brahm) the statement is a truth.
श्री प्रकास (गुजराती)

हक तालाने किया फुरमान, डांटत हैं कीने कुफरान ।
अंजीर तौरेत से जो फिरे, सोई काफर हुए खरे ।।३

कुरानके अनुसार खुदाने जो कुछ कहा है अवज्ञाकारी लोग उसे कपट भावसे छिपाते हैं. जो लोग अंजील तथा तौरातसे विमुख होंगे उनको ही विशेष रूपसे अवज्ञाकारी (काफिर) कहा गया है. (इधर परब्रह्म परमात्माके आदेश स्वरूप रास, प्रकाश, कलश आदि ग्रन्थ श्रीप्राणनाथजीके द्वारा अवतरित हुए उनको विहारीजीने कपट भावसे छिपानेका प्रयत्न किया. जो इन ग्रन्थोंसे विमुख होंगे वे ही वास्तवमें नास्तिक कहलाएँगे).
Lord Supreme has sent this message and he is scolding at those who are cynical about Anjir/Toret (Raas, Prakash and Kalash) as Athiest(non-believers). Those who go against these scriptutes are in true sense the non-beleivers.
(Remember there is penalty for non-believing the original truth for me not becoming closer to God itself is severe punishment but some people care less about it for them there is dojhakh!)

काफर दिलमें कीना आने, अंजीर तौरेत पर मारे ताने ।
जो खुदाएका पैगंमर, तिनसे फिरे सो हुए काफर ।।४
प्रकरण १० बड़ा क़यामतनामा
ऐसे अवज्ञाकारी लोग हृदयमें कपट भाव रखकर अंजील एवं तौरातके (रास, प्रकाश, कलश ) वचनों पर ताना मारते हैं. परमात्माका सन्देश लेकर आनेवालोंसे जो विमुख होते हैं उनको ही अवज्ञााकारी (काफिर) कहा है.
इस प्रकार हृदयमें कपट भाव होनेके कारण विहारीजी रास, प्रकाश, कलश आदि ग्रन्थोंको देख कर दुःखी हुए और उन्होंने सुन्दरसाथको उन ग्रन्थोंके ज्ञाानसे वञ्चित रखनेका प्रयास किया.

The people who do not have faith in the heart because of their vested interest speak sarcastically about the Angil and toret(Raas, Prakash, Kalash) which are the messages from the Lord but they turn against it and hence they are the infidels.
(Many of Ahuja devotees do this at regular basis!)

जुबां यकीन क्यामत न माने, ऊपर इसलाम के कीना आने ।
उनसे जो हुए मुनकर, सोई गिरो कही काफर।।५
प्रकरण १० बड़ा क़यामतनामा
ऐसे लोग मुखसे तो विश्वास करते हैं किन्तु उनके बताए हुए कयामतके सङ्केतोंके प्रकट होने पर विश्वास नहीं करते हैं एवं धर्मके वचनोंके प्रति कपट भाव रखते हैं. जो लोग ऐसे वचनोंसे विमुख होते हैं उनको ही कुरानमें काफिर कहा है.
Every one by the lips say they do believe in the messenger of the Lord (Mahamati Prannath) but in deeds actually they do not, they go against the essence of the religion, such group is called infidel.

मुनकर हुकम और क्यामत, हुए नाहीं नेक बखत ।
फंद माहें हुए गिरफतार, भमर हलाकी पडे कुफार ।।६
प्रकरण १० बड़ा क़यामतनामा
जो लोग परमात्माके आदेश एवं कयामतकी घड.ीसे विमुख होते हैं उनके भाग्य कभी नहीं खुले हैं. ऐसे लोग माया-मोहके बन्धनोंमें ही फँसे हुए हैं और भवसागरकी भँवरीमें पड.कर जन्म-मरणरूपी दुःख भोग रहे हैं.
Those who do not believe the command of the Lord and this moment of awakening(Qayamat) it is their misfortune. They will be caught in the noose of the maya and they will end themselves in the world of misery and shall not be out of the cycle of birth and death.

देखाई राह तौरेत कुरान, कुफर सबोंका दिया भान ।
ल्याया नहीं जो यकीन, सो जल दोजख आए मिने दीन ।।८
प्रकरण २ श्री कयामतनामा (बडा)
उन्होंने तौरात और कुरानका मार्ग प्रशस्त करते हुए कलश और सनन्ध ग्रन्थके द्वारा उपदेश दिया और सभीके हृदयकी भ्रान्तिको मिटा दिया. जिन्होंने उन पर विश्वास नहीं किया वे नरककी अग्निमें जलकर शुद्ध होकर सत्यधर्ममें प्रविष्ट हुए.

Lord has directed the path of living through Toret Kalash and Kuran Sanandh and has given the right consciousness to all. Those who do not believe they will suffer the fire of hell which will purify them and they will gain the truth(true religion= deen)

जो कहे हैं नेकोंकार, पाया छिपा भला दीदार ।
जो फुरमान के बरदार, सोई नेक गिरो सिरदार ।।११

प्रकरण ३ श्री कयामतनामा (बडा)
जिन आत्माओंको कुरानमें श्रेष्ठ कार्य करनेवाली कहा है, उनको कयामतके समयमें अवतरित सद्गुरुमें परमात्माके दर्शन प्राप्त हुए हैं. जो उनके आदेशका पालन करती हुइंर् चलतीं र्है उन श्रेष्ठ आत्माओंके समुदायको शिरोमणि कहा है.
Those who are said as the performer of great deeds they got glimpse of Lord who was in the veil(in human form) and those who follow the message of the Lord(furman) shall be called the leader of such great souls.

ए जो कहीं किताबें तीन, तिनपर है हक का यकीन ।
सिफत जमाने पैगंमर, रखना बीच खुदाए का डर ।।१२
प्रकरण ३ श्री कयामतनामा (बडा)
जो तीन पुस्तकें (अंजील, तौरात एवं कुरान) ब्रह्मज्ञाान सम्बन्धी कही गईं हैं, उनमें परमात्माके प्रति विश्वास रखनेका उपदेश दिया है. उनमें अन्तिम समयमें आनेवाले पैगम्बरकी प्रशंसा लिखी गई है और यह भी कहा है कि तुम सदैव परमात्माका डर रखते रहना.
These three books (Angil, Torah, holy Quran) are related to the Supreme and contains message for those who have faith in Lord. These books have appreciated the last messenger of Lord (Imam mehdi) and also has warned everyone to always have the fear of Lord.

अंजीर तौरेत और कुरान, इन पर होए आया फुरमान ।
जो हबसे का पातसाह, पाई इन किताबों से राह।।१३
प्रकरण ३ श्री कयामतनामा (बडा)
अंजील तौरात और कुरान इन तीनों ग्रन्थोंमें खुदाका सन्देश आया है. कुरानमें जिनको हब्साका बादशाह कहा है वे श्रीप्राणनाथजी हैं. उनके द्वारा अभिव्यक्त रास, कलश एवं सनन्ध आदि धर्मग्रन्थोंसे ब्रह्मात्माओंको परमधामका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है.
Angil,Tohra and Holy Quran brought the message of the Lord. Holy Quran has said it is the Lord of Habsa that is none other but Shri Prannathji who through Raas(Angil), Torah(Kalash) and Sanandh(Holy Quran) showed the way to Paramdham the Supreme Abode.

इनकी जो करे उमेद, मुराद इसलाम पावे भेद ।
जो कहे दोस्त साहेब महल, नजीक खुदाए के खासे फैल ।।१४
प्रकरण ३ श्री कयामतनामा (बडा)
जो ब्रह्मात्माएँ इन धर्मग्रन्थोंके गूढ. रहस्योंको समझनेकी अभिलाषा रखतीं हैं उनको ही धर्मका गूढ. रहस्य प्राप्त होता है. जिन आत्माओंको परमात्माके मित्र कहा है एवं जिनके हृदयमें परमात्माका सिंहासन है, वे ही परमात्माकी निकटताका अनुभव कर शुभ कार्योंमें प्रवृत्त होतीं हैं.
Only those who desire to understand the deeper meaning only those souls are graced with secrets. Those who are companions of the Master in the supreme abode only those souls will find Lord closer to them through their good deeds.

इन महंमद के दीन में, सक सुभे जरा नाहें।
सो हकें दिया इलम अपना, ए सिफत होए न इन जुबांएं।।१० प्रकरण ४ श्री खुलासा
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आखर आए रूहअल्ला, सो लीजो कर यकीन।
ए समझेगा बेवरा, सोई महंमद दीन।।१९

जो कछू कह्या महंमदें, ईसे भी कह्या सोए।
ए माएने सो समझही, जो अरवा अरस की होए।।२०

श्रीठकुरानीजी रूहअल्ला, महंमद श्रीकृस्नजी स्याम।
सखियां रूहें दरगाह की, सुरत अक्षर फिरस्ते नाम।।५३
प्रकरण १२ खुलासा

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