हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

अब जो सुनो खास उमत, खडे रहो दोजक एक बखत

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बुजरकों धोखा क्यों ए न जाए, तो बखत ऐसा दिया देखाए ।
फितुए इनोंके जावें तब, ऐसा कठिन बखत देखंे जब ।।३४

तथाकथित ज्ञाानियोंका भ्रम किसी भी प्रकार दूर नहीं होता है. इसीलिए कयामतके समयको इस प्रकार कठिनाई पूर्ण कहा गया है. इन लोगोंके मनकी भ्रान्तियाँ तभी दूर होंगी जब वे ऐसी कठिन घड.ीको प्रत्यक्ष देखेंगे.
Those who think oneself very learned and proficient will betray such is the time I can foresee.
The confusion from the mind of the one who consider oneself knowledgeable cannot go away. Very difficult time is seen. The confusion from their mind will be removed when they see the time of difficulty.

ठंडे बजूद होवें वर पाए, तब हकीकत देखे आए ।
सब दुनिायां हुई गुन्हेगार, यों देख्या बखत दोजखकार ।।३५

नरककी अग्निमें जल कर शुद्ध होने पर इनके मनमें शीतलता छा जाएगी तभी वे यथार्थताको समझ पाएँगे. सभी अभिमानी लोग अपराधी बन गए. ऐसे नरकगामी लोगोंने ही इस कठिन समयको देखा.

After facing difficult time or experiencing the hell, these souls will understand the truth and reality. All the worldly people are sinners and at this time these sinners who experience the hell will see the difficult time.

After cooling down from the pride of the existence they will get the master(वर) and then they will see the reality(हकीकत). The world is called sinners can see such time of the hell dwellers.

अब जो सुनो खास उमत, खडे रहो दोजक एक बखत ।
जिन भागो गोसे रहो खडे, देखो दोजकियों खजाने बढे ।।३६

जो श्रेष्ठ आत्माएँ हैं वे अब सुनें, उनको अपने प्रेम और विश्वासमें दृढ. रहना चाहिए. सब अधर्मी लोगोंके लिए नरककी अग्निकी लपटें चारों ओर छा जाएँगी. ऐसे समयमें अपने धैर्य एवं विश्वास पर खड.े रहो. अपने कर्तव्य पथसे विचलित नहीं होना. देखो, नरकगामियोंके लिए यातनाएँ बढ. रहीं हैं.
Those who are celestial souls listen now and be alert at this time. Do not let the love and faith for Lord falter because of the sinners. Be patient and trust the Lord and continue the path of truth and reality. Behold the pains for the sinners in the hell is rising.

भिस्त रजवान मोमिन निगेहवान, दोजख खजाना पोहोंचे कुफरान ।
तहां ताहीं बखत पोहोंचे सबन, पैदरपें जले अगिन ।।३7

जिन जीवोंके ऊपर ब्रह्मात्माओंकी कृपा होती है उनको सबसे उच्च बहिश्त प्राप्त होगी. जो लोग अवज्ञााकारी होंगे उन्हें नरककी यातनाएँ प्राप्त होंगी. वे लोग जब तक परमात्मा पर विश्वास नहीं लाएँगे तब तक नरककी अग्निमें बार-बार जलते रहेंगे.
Those who do not understand and belief that is truth and reality they will suffer.

गुजरे हैं हदसों काफर, दूर दराज जानी थी आखर ।
दुख लंबे हुए तिन कारन, यों मता पाया दोजखीयों हाल इन ।।३८

ऐसे अवज्ञााकारी लोग पापकी सीमाएँ पार कर चुके हैं. उनको कयामतकी घड.ी दूर लग रही थी. इसीलिए उनके दुःख दीर्घ काल तक चलते रहे. इस प्रकार अवज्ञााकारी लोगोंने नरककी अनेक सम्पदाएँ (यातनाएँ) प्राप्त कीं हैं.

Those who think the day of judgement is far away and do not have faith that it does exist, their suffering will continue for very long time, because of their belief they attain such state.
प्रकरण २२ श्री कयामतनामा (बडा)

किनको नफा न देवे कोए, तब कोई न किसीके दाखिल होेेए ।
कूवत तिन समें कहूंए जाए, तो कोई नफा किसी को न सके पोहोंचाए ।।7

न्यायकी इस घड.ीमें कोई भी किसीको लाभ नहीं पहुँचा पाएगा एवं कोई भी किसीके दुःख सुखमें सहयोगी नहीं हो पाएगा. उस समय किसीका भी चातुर्य अथवा अहङ्कार कहींका कहीं उड. जाएगा. इसलिए कोई भी किसीको लाभ नहीं पहुँचा सकेगा (सबको अपने ही शुभाशुभ कर्मोंका यथायोग्य फल प्राप्त होगा).
At the time of judgement no one can recommend anyone or help one another, the cunningness cannot work either, each and everyone will reap what they have sowed.

हुकम हादिका साहेब फुरमान, करे सिफायत खुदा मोमिनों पेहेचान ।
मोमिन यकीनदारोंको चाहंे, हकमें भी उन ही को मिलाए ।।८

सद्गुरु श्रीदेवचन्द्रजीके आदेशसे इमाम महदी श्रीप्राणनाथजी सभीको यहाँ सन्देश दे रहे हैं और ब्रह्मात्माओंको परमात्माकी पहचान करवा कर उनकी अनुशंसा (सिफारिश) कर रहे हैं. परब्रह्म परमात्मा (उनके प्रति) विश्वास करने वाली ब्रह्मात्माओंसे प्रेम करते हैं और उनको ही दिव्य परमधामकी अपनी लीलाओंमें सम्मिलित करते हैं.
Our master Prannathji is giving us the command of Hadi(Devchandraji maharaj) who reminded and recommened the celestial souls of our Supreme Lord. The firm faith is expected from these souls.
Lord loves those who has firm belief in Him and He only unites with them.
प्रकरण २३
श्री कयामतनामा ग्रन्थ (बडा)

बिना श्रीकृस्नजी जेती मत, सो तूं जानियो सबे कुमत ।
कुमत सो कहिए किनको, सबथें बुरी जानिए तिनको ।।६
प्रकरण २१ प्रकाश (हिंदुस्तानी)
श्रीकृष्णजीके बिना जितनी भी मति हैं उन सबको तुम कुमति ही जानो. कुमति उसीको कहना चाहिए जो सबसे बुरी (निन्दित)होती है.
Without Shri Krishna all the intelligence, understand that all are stupidity, the stupidity(कुमत) also that one which is of worst kind.

ए सुख या मुख कह्यो न जाए, याको अनभवी जाने ताए ।
ए कुमत कहिए तिनसे कहा होए, अंधकूपमें पडिया सोए ।।९
प्रकरण २१ प्रकाश (हिंदुस्तानी)
इन सुखोंका वर्णन इस मुखसे नहीं हो सकता. अनुभवी व्यक्ति ही इस सुखको जान सकते हैं, जिसे कुमति कहा गया है उसके वशीभूत होनेसे क्या होता है ? ऐसी बुद्धि वाला अन्धकूप (नामक नरक) में पड. जाता है.

This bliss one cannot describe with this tongue, only those who have experienced it can understand and those who are stupid(कुमत) they will end in the Andh koop named hell.

सब दुखोंमें बुरा ए दुख, कुमत करे धनीसों बेमुख ।
केतो कहूं या दुख को विस्तार, जाके उलटे अंग इंद्री विकार ।। १०
प्रकरण २१ प्रकाश (हिंदुस्तानी)
सब दुःखोंसे बुरा दुःख यही है कि कुमति परमात्मासे विमुख कर देती है. इस दुःखका मैं विस्तारसे कितना वर्णन करूँ ? इसके कारण सभी गुण अंग इन्द्रियाँ उलटी होकर विकारी हो जातीं हैं.

Out of all the sufferings, this is the worst one, the stupidity(कुमत) makes them go against the supreme. What can I say about the sufferings of this, their senses go against the soul and thus will be a vikaar(disorder)!
The person with disorder forever looks for sense gratification which is momentary (does not last long) and hence never satisfied this creates dissatisfaction which further creates frustration which is followed by anger, anger creates forgetfulness, confusion in mind, which creates lack of consciousness(does not what one is saying or doing) and thus further destruction which leads to misery and sufferings!

दोऊ मतको कह्यो प्रकार, ए ब्रह्मसृष्टि करें विचार ।
जाको जाग्रत है बडी बुध, चेते अवसर जाके हिरदे सुध ।।११
प्रकरण २१ प्रकाश (हिंदुस्तानी)
मैंने दोनों प्रकारकी मतिका विवेचन कर दिया है. ब्रह्मसृष्टि उन पर विचार करेंगी. जिसमें बड.ी बुद्धि (महामति) जागृत हो जाएगी वह हृदयमें सुधि प्राप्तिकर इस सुअवसरमें सचेत हो जाएगी.
The two kind of intelligence(बडी मत superior intelligence and stupidity कुमत ), I have described, brahmshristi(celestial souls of Paramdham) must think over it those whose greater mind(connected with the cosmic intelligence) is awakened and their heart is purified, they will consciously grasp this opportunity. Only the brahmshristi will understand the distinction between the superior intelligence (understanding) and the stupidity!
This is a request by Indrawati(celestial souls of Paramdham) who is sitting before Lord Supreme to those celestial souls who are still wondering in the world to pay attention to these two differences in the intelligence.
The beloved Lord she is talking about is Shri Krishna of nijghar(Paramdham).