हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

"Mahamati"

स्याम स्यामाजी आए देखो खेल बनाए, सब उठियां हंसकर ।
खेले महामति देखलावे इंद्रावती, खोले पट अंतर ।।१० प्रकरण ४० श्री परिक्रमा
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उस समय श्रीश्यामश्यामाजीने वहाँ पर आकर सखियोंकी यह लीला देखी तो सभी सखियाँ हँसती हुईं उठ गइंर्. इस प्रकार इन्द्रावती आदि सखियोंके इन खेलोंको दिखाते हुए महामति सभी सुन्दरसाथके अन्तर पटको खोल रहे हैं.

श्री भागवत को करत श्रवण, श्री पुरुषोत्तम दियो दर्शन /
प्रथम दृष्टि उजियारो आयो, पीछे स्वरूप को दर्शन पायो // 39 //

वय किशोर अति सुन्दर स्वरूप, तेज पुंज सिंगार अनूप /
श्री श्यामा जी की सुरत सुदेश, तापर पुरुषोत्तम आवेश // 40 //

आज्ञा, बुध, अरु मूल तारतम, पांचो निध आई उत्तम /
कह्यो थो श्यामनी रास मोझारी, अहम् कृष्ण कृष्ण भई प्यारी // 41 //

है स्वरूप सुन्दर सुखदाई, साक्षात जागनी रूप सुहाई /
श्री देवचन्द्र जी को दर्शन जब भयो, तब होकारो कथा को रेहे गयो // 42 //
श्री जयराम कंसारा जी (करुणा सखी) द्वारा रचित बीतक

बुद्धि सु अक्षर ब्रह्म की जगी रास मधि सोई । ध्यान कार्यो ब्रज्रासको बहुबिध चेतन होई ।।
जाग्रत बुद्धि को तातें प्रयो जू नाम । श्यामा ताको संग ले प्रगटी नौतन ठाम ।।
(वृत्तान्त मु. ३४ )
The intelligence of Akshar was awakened at Raas. If you meditate on Braj and Raas you will become conscious. Shyama using this awakened mind appeared in Nautan place.
Akshar then provides the cosmic consciousness noor budhi so to understand the creation and also attracts the gyaan from moolbudhi to itself. Thus we see the creation/destruction laws of creation and Akshar sees the leela of Paramdham.