हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

Bhajan

नाम माला उर धारो साधू भाई , कृष्ण माला उर धारो !
संध्या समय सुध चित कर के , प्रभुजी को नाम चितारो !!
चार पदार्थ पाई अमोलक , सो बृथा नहीं हारो !
मनुष्य तन दुर्लभ है साधू , सो क्यों भूली गुजारो !!
कृष्ण कृष्ण मुख रटत रात दिन , स्वास ही स्वास पुकारो !
कृष्ण कृष्ण मुख रटत निरंतर , स्वास ही स्वास पुकारो !
जिस देहि प्रभु पूरण मिल्यो है , सोही जनम तुम्हारो !!
'कृष्ण दास ' मुख कृष्ण बखानत , क्षर अक्षर से न्यारो !
पूरण ब्रह्म सनातन दोए भुज , मोहन मित्र हमारो
ब्रह्मुनी श्री स्वामी कृष्ण दास जी

कृष्ण नहीं अवतारी साधू भाई , कृष्ण नहीं अवतारी |
पूरण ब्रह्म सनातन दोए भुज , कहत है निगम पुकारी ||
गोपी कृष्ण अनादी एक है , जल तरंग ज्यो वारी |
कारन मूल रच्यो एक कारज , आन भई ब्रज नारी ||
तिन गोपीन की पद रुज बांछत , ब्रम्हा बिष्णु त्रिपुरारी |
करी करी कोटि तपस्या बहु बिध , त्रिगुण थके पछिहारी ||
लीला त्रिबिध भये नाना बिध , बाल तरुण वृद्ध नारी |
कहत 'मुकुंद' सतगुरु समरथ बिना , कोही ना सके निरवारी ||
मोमिन - श्री मुकुंद दास जी (नवरंगबाई)

मुरली कौन बजाये द्वारे मेरे , बांसुरी कौन बजाये !
बाकि बाकि तान कहत मुरली में , राधे के गुण गाये !!
हाथ लकुटिया कांध कमरिया , नंदजी की धेनु चराए !
इत गोकुल उत मथुरा नगरी , बिच में दान चुकाए !!
पैठी पाताल काली नाग नाथ्यो , फन पर निरत कराये !
'छत्रसाल' नगर बलिहारी , चरण कमल बलि जाये !! ***"श्री प्राण नाथजी के दीन में , जो कोही ल्यावे ईमान !
'छत्रसाल' तिन उपर , तन मन धन कुर्बान !!"*** (महाराजा श्री छत्रसाल जी - सखी स साकुण्डल बाई ).

"जाऊं कहाँ महाराज शरण तजी , जाऊं कहाँ महाराज ! अन्ते ठोर कतहु नाही हमको , चरण छोड़ी ब्रज राज !! जो जो आये प्रभु शरण तुम्हारी , तिनके किये सब काज ! शरणे मरण सुन्यो नाही कबहो , बड़े हो गरीब नीवाज़ !! पावन पतित निगम यश गावात , श्रवन सुनत आवाज़ ! जो पतिताई अघ मिटे ना मेरो , बिरदाही आवत लाज !! बिनती करत "मुकुंद" दीन द्विज , सब पतितन सिरताज ! दीन जानी प्रभु पार उतारो , लेवो चढ़ाये जहाज !!" -मुकुंद स्वामी {सखी नवरंग्बाई }

उन्ही को होग तुम्हारा दर्शन, जो तेरे चरणों में आ चुके हैं।
सफल हुये हैं उन्हींके जीवन, जो तेरे चरणों में आ चुके हैं॥
न पाया तुझको अमीर बनके, न पाया तुझ को फकीर बनके।
सफल हुई है उन्ही की पूजा , जो तेरे चरणों में आ चुके हैं॥
जहां भी जिसने तुझे पुकारा, दिया है तुमने उसे सहारा ।
कटे हैं उनके दु:खों के बन्धन, जो तेरे चरणों में आ चुके हैं ॥