हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

One God


पार पुरुष पिया एक हैं, दूसरा नाहीं कोए।
और नार सब माया, यामें भी विध दोए।।२

पूर्णब्रह्म परमात्मा स्वयं एक हैं. वस्तुतः उनके अतिरिक्त कोई है ही नहीं. बाकी तो सब माया है. इस मायामें भी दो प्रकारके जीव हैं.
The beloved Lord of the beyong is only one and there is no two. The world is originated from Maya.
प्रकरण १३ kalash
एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।
कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिवासः साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च ॥११॥

eko devah sarvabhutesu gudhah
sarvavyapi sarvabhutantaratma।
karmadhyaksah sarvabhutadhivasah
saksi cheta kevalo nirgunascha ॥ 11॥

એક પરમ તે દેવ સર્વની હૃદયગુફામાં વાસ કરે,
સઘળે વ્યાપક, સૌ પ્રાણીના અંતર્યામીરૂપ રહે;
કર્મતણાં ફલ તે જ દે, બધા જીવોનો તે આશ્રય છે,
સૌનો સાક્ષી, ચેતન, કેવલ, શુદ્ધ અને ગુણથી પર છે. ॥૧૧॥

અર્થઃ

એકઃ - એક
દેવઃ - દેવ જ
સર્વભૂતેષુ - સઘળાં પ્રાણીઓમાં
ગૂઢઃ - છૂપાયેલા
સર્વવ્યાપી - સર્વવ્યાપક
સર્વભૂતાન્તરાત્મા - સર્વે પ્રાણીના અતંરાત્મા પરમાત્મા છે.
કર્માધ્યક્ષઃ - (એ જ) સૌનાં કર્મોના અધિષ્ઠાતા છે.
સર્વભૂતાધિવાસઃ - સર્વે ભૂતોના નિવાસસ્થાન
સાક્ષી - સૌના સાક્ષી
ચેતા - ચેતનાસ્વરૂપ
કેવલઃ - પરમ પવિત્ર
ચ - અને
નિર્ગુણઃ - ગુણાતીત છે.
Chapter 6, Verse 11
Swetasvatara Upanishad


धरे नाम खसम के, जुदे जुदे आप अनेक।
अनेक रंगे संगे ढंगे, विध विध खेलें विवेक।।३३

इस प्रकार अपनी समझ और आस्थाके अनुसार कई लोगोंने परमात्माके अलग-अलग नाम रख लिए हैं. अपनी-अपनी विवेक बुद्धिके आधार पर अपनी उपासनामें भी अनेक प्रकारके रङ्ग-ढङ्ग रचे हैं.
People keep different names of the beloved Master (groom of the soul) as per the differences in the world. By many color, attitudes, everyone is playing as per their intelligence.

खसम एक सबन का, नाहिंन दूसरा कोए।
एह विचार तो करे, जो आप सांचे होए।।३४

परमात्मा सबके एक ही हैं. उनके अतिरिक्त कोई दूसरा है ही नहीं. इस रहस्य पर वे ही विचार कर सकते हैं, जो स्वयं सत्य (परमधामकी) आत्मा हैं.
The beloved Master of all is One and there are no two God. Only one who is true to oneself a seeker of truth will think ever think it.
प्रकरण १४ kalash

एक खुदा हक महंमद, हर जातें पूजें धर नाऊं।
सो दुनियां में या बिना, कोई नहीं कित काहूं।।२०

रसूल मुहम्मदने कहा कि एक ही पूर्णब्रह्म परमात्मा हैं किन्तु विभिन्न जाति तथा सम्प्रदाय वाले उनको भिन्न-भिन्न नामसे पूजते हैं. वस्तुतः एक परमात्माके अतिरिक्त इस संसारमें अन्य कोई कहीं भी नहीं है.

There is one Supreme God (Khuda) but different sects worship keeping different name but in this world without Him there is nothing else.

सब जातें नाम जुदे धरे, और सबका खावंद एक।
सबको बंदगी याही की, पीछे लडे बिन पाए विवेक।।२२

सभी जातिके लोग एक ही परमात्माको भिन्न-भिन्न नामोंसे पुकारते हैं परन्तु परमात्मा (स्वामी) तो सबका एक ही है. वस्तुतः पूजा भी सभीको इन्हींकी करनी है परन्तु विवेकके अभावसे सभी परस्पर कलह करते हैं.

Different sects(race, caste,region) name Him by different name, but there is only one Master of all. All are worshiping only Him but they are fighting because they have no intelligence to understand.
प्रकरण २ khulasa


जो कछू कह्या कतेबने, सोई कह्या वेद।
दोऊ बंदे एक साहेब के, पर लडत बिना पाए भेद।।४२

जैसा कतेब ग्रन्थोंमें कहा गया है, वेदोंमें पहलेसे ही वही बात की गई है. वास्तवमें हिन्दू या मुस्लिम दोनों एक ही परमात्माके सेवक (बन्दे) हैं परन्तु इस रहस्यको न समझनेके कारण वे परस्पर लड.ते-झगड.ते हैं.

What Holy Quran has said so has said the Ved both the devotees(servant of Lord) worship One master(Saheb) but they are fight amongst themselve as they do not understand this secret.
Who is the Saheb? He is the one master that all scriptures are pointing to! Mahamati has further cleared who the Master is so please continue understanding!

बोली सबों जुदी परी, नाम जुदे धरे सबन।
चलन जुदा कर दिया, ताथें समझ ना परी किन।।४३

सबकी भाषाएँ भिन्न-भिन्न होनेके कारण उन्होंने परमात्माके नाम भी अलग-अलग रख दिए हैं. इस प्रकार आचरण तथा पूजा-पद्धति भी भिन्न प्रकारकी बनाई गई है. इसीलिए किसीको भी यथार्थ समझमें नहीं आया.

The language is different and the terminology is also different and their rituals are different hence they could not understand the reality.
प्रकरण १२ shri Khulasa