हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

Kabeer


हरि दर्जी का मर्म न पाया , जिन योह चोला अजब बनाया
पानी की सुई पवन का धागा , नौ दस मास सिवते लागा
पांच तत् की गुदरी बनाई , चंद सूरज दो थिगरी लगाई
कोटि जतन कर मुकुट बनाया , बिच बिच हिरा लाल लगाया
आपे सिवे आप बनावे , प्रान पुरुष कुं ले पहरावे
कहे कबीर सोई जन मेरा , नीर खीर का करे निवेरा

Here Saint Kabir has clearly spoken about 3 Purush(entities)
Hari-Akshar the creator who creates the Kshar(who is born)
and he submits His creation to the Master of life(Aksharateet Par-Brahm). The creation-creator and the Master is spoken in the verse.
Sant Kabir has said, those who can understand the above verse ,will understand the truth, separate the outer meaning (water) from the inner meaning (khir)) is a person whom he adores or calls his own clan.

चलते चलते पग थके , नगर रहा नव कोस।
बीच डेरा पड गया, कबीर किन्हें देय दोस॥


अक्षर लोक के उपर , अक्षरातीत अनूप।
निरख हंस कौतुहल करे , दरसे युगल स्वरूप॥


जो घर में अबला बसे, सोही प्रेमका पूर।
दास कबीर यों कहे, सो घर हमसे दूर॥


हद हद सब कोइ गया, बेहद गया न कोय।
हद बेहद के बीच में, रहा कबीर सोय ॥


एक पलकतें गंग जो निकसे, हवै गयो चहूं दिस पानी ।
उही पानि द्वै पर्वत ढांपे, दरिया लहर समानी ॥
उड मक्खी तरवर चढ बैठी, बोलत अमृत बानी ।
उही मक्खी के मक्खा नाहीं, बिन पानी गर्भानी ॥
तेही गर्भ गुन तीनों जाये, वह तो पुरुष अकेला ।
कहै कबीर य पदको बूझे, सो सतगुरु मैं चेला ॥
अक्षर पुरुष एक वृक्ष है, निरंजन ताकी डार ।
त्रगुन सरूप शाखा भये, पत्र भयो संसार ॥

EK RAM DASHRATH KA BETA , EK RAM JO GHAT GHAT BETHA
EK RAM KA SAGAL PASARA, EK RAM JO SAB SE NYARA
wohi ram dashrath ka beta
wohi ram ghat ghat mein leta
usi ram ka sagal pasara
wohi ram duniya se nyara

ek Ram jo Raghuvansh Dasrath putra they, ek Ram jo ghat ghat mein chetana swaroop aatma hai, ek Ram jo Akhand Avinashi Akshar Brahm hai jis prakriti saansaar ki utpati aur lay unka hee saara bichhaya hua brahmand hai aur ek Ram jo Akshar se bhi nyaara hain Anadi hai, satya hai aur aanand ke datar hai aur mool swaroop hai.
ab sab Ram char huye lekin sabhi mein ek hi Ram jo sabse nyaara hai usi ki chetana hai!
राम नाम में भी भेद है.
राम नाम में भी भेद है ,जो लोग कुलजम स्वरुप पर ईमान नहीं रखते उनको यह समझ नहीं आएगा , इसीलिए जो रखते हैं उनके लिए है ! प्रेम प्रणाम !
एक राम दशरथ का बेटा , एक राम जो घट घट बेठा
एक राम का सगल पसारा , एक राम जो सब से न्यारा
वही राम दशरथ का बेटा
वही राम घट घट में लेटा
उसी राम का सगल पसारा
वही राम दुनिया से न्यारा
संत कबीर
एक राम जो रघुवंश दसरथ पुत्र थे , एक राम जो घट घट में चेतना स्वरुप आत्मा है , एक राम जो अखंड अविनाशी अक्षर ब्रह्म है जिस प्रकृति संसार की उत्पति और ले उनका ही सार बिछाया हुआ ब्रह्माण्ड है और एक राम जो अक्षर से भी न्यारा हैं अनादी है , सत्य है और आनंद के दातार है और मूल स्वरुप है.
अब सब राम चार हुए लेकिन सभी में एक ही राम जो सबसे न्यारा है उसी की चेतना का विस्तार है !

किसी ने हरी दरजी का मर्म यानी भेद नहीं पाया, जिन्होंने यह अजब चोला (सरीर ) बनाया, पानी की सुई पवन का धागा, जिसे सिलने नौ दस माह लग जाते हैं, पांच तत्व से यह सरीर बनाया और चाँद और सूरज प्रकाश और उष्णता के लिए लगाई, सर में दो ऑंखें, नाक, कान, मुह जैसे हीरा लाल लगाया। अब यह स्वयं सिलते हैं स्वयं बनाते हैं और प्राण पुरुष को समर्पित करते हैं|
यहाँ संत कबीर ने तीन पुरुषों के विषय में बताया है, हरी अक्षर जो सृष्ठी करता हैं क्षर ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति करते हैं और फिर सारी सृष्ठी प्राण पुरुष पर समर्पित करते हैं!
अक्षरातीत परब्रह्म प्राण पुरुष हैं इसीलिए उनको प्राणनाथ कहा है। यह जागनी ब्रह्माण्ड में जाहेर हुए और उनका नाम श्री कृष्ण कहा!
Read the same is given in Bhagavat Geeta too
Tartamya1
Tartamya2
http://www.gita-society.com
Bhagavat Gita
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Paramdham

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