हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

आरती

आरती
आनन्द आरती संझा किजै,
नवल किशोर निरखि सुख लीजै ॥१
पहिली आरती व्रज में वासा,
सब सखियन मिलि देखे तमासा ॥२
दूसरी आरती रासमें आये,
अक्षर मनोरथ पूरन कराये ॥३
तीसरी आरती श्याम सुहाई,
सुर असुरन धनी सबन मिलाई ॥४
चौथी आरती बुध्दजी मन भाई,
तारतम ज्योति करि रोशनाई ॥५
पांचमी आरती विजयाभिनंदन,
जागनी लीला कलियुग निकंदन ॥६
आरती यह श्री महमति गाई,
आशादास सुनत सुख पाई ॥७