हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

Mahamati Prannath on Scriptures

सास्त्र श्रवण श्री भागवत,बुद्ध जागृतिको ज्ञान |

साधो भाई चीन्हो, सबद कोई चीन्हो।
ऐसो उतम आकार तोको दीन्हों, जिन प्रगट प्रकास जो किन्हों ।।१

हे साधुजन ! परमात्माकी पहचान करानेवाले शास्त्र वचनोंके रहस्यको समझो (इन शब्दोंका ज्ञाान प्राप्त कर अपनी अन्तरात्माको पहचानो). धामधनीने तुम्हें ऐसा श्रेष्ठ शरीर (मनुष्य देह) दिया है, जिसके द्वारा परमात्माका साक्षात् अनुभव किया जा सकता है.

O seeker understand the Reality enmeshed in the words of scriptures. You have got a human form which is the greatest amongst other living beings in which you can see the one who brought the light for us (you can see the Supreme)

मानषे देह अखंड फल पाइए, सो क्यों पाएके वृथा गमाइए।
ए तो अधखिनको अवसर, सो गमावत मांझ नींदर।।२

मनुष्य शरीरके द्वारा ही परब्रह्म परमात्मारूपी अखण्ड फल प्राप्त हो सकता है. ऐसे महामूल्यवान् मानव शरीरको प्राप्त कर उसे क्यों व्यर्थ गँवा रहे हो? यह अवसर तो आधे क्षणके लिए प्राप्त हुआ है, इसे अज्ञाानरूपी निद्रामें पड.कर व्यर्थ गँवा रहे हो.

The human body can achieve the indivisible, imperishable, eternal Supreme Godhead; After receiving such valuable form why do you let it waste for nothing. The opportunity of this moment which is split of a second why do you waste in sleeping. Wake up Sundarsath and make best use of your time, achieve the love of Lord in this precious birth as a human being, this opportunity is only for few moments.

सबदा कहे प्रगट परवान, सबदा सतगुरसों करावे पेहेचान ।
सतगुरु सोई जो अलख लखावे, अलख लखे बिन आग न जावे ।।३

धर्मशास्त्रोंके (शब्दोंके) द्वारा यथार्थ ज्ञाान प्रकट होता है और वे धर्मशास्त्र ही सद्गुरुकी पहचान भी कराते हैं. जो पूर्णब्रह्म परमात्माकी वास्तविक परख करवाते हैं वे ही सद्गुरु कहलाते हैं. क्योंकि परमात्माकी पहचान हुए बिना अन्तर्दाह (त्रय ताप) नहीं मिटती है.

The words in the Scriptures say can describe Reality and it also guides you how to recognize the true guru. The true guru (satguru) is the one who can reveal the Supreme and without knowing the Supreme Truth the fire burning as the desire can never be extinguished.

सास्त्र ले चले सतगुरु सोई, वानी सकलको एक अरथ होई ।
सब स्यानांेकी एक मत पाई, पर अजान देखे रे जुदाई ।।४

धर्मग्रन्थोंके प्रमाणभूत सिद्धान्तोंके अनुरूप चलने वाले ही सद्गुरु हो सकते हैं. सब धर्मग्रन्थोंकी वाणी समान अर्थ धारण करती है (अर्थात् एक ही पूर्णब्रह्म परमात्माकी ओर संकेत करती है). वास्तवमें सब ज्ञाानीजनोंका अभिप्राय भी एक है, किन्तु धर्मग्रन्थोंके सिद्धान्तोंको न समझने वाले अज्ञाानीजन उनमें भिन्नता देखते हैं.

Remember the true Guru is the one who approves all the scriptures as all the teaching of all the scriptures of all the religions has one and one reality. And all the wise also hold one and only one truth it is the ignorant who sees the differences and create conflicts.
Mahamti Prannathji finds no conflict in any shastra scriptures, holy Quran and Bible. He said they all point to one Lord but they have hidden the Reality so only a true seeker could see. He tried hard to clarify the mysticism in all the shastras but look at Dunis! They have divided tartamsagar into Meherraj says, Indrawati says and Mahamati says and continue their conflict. What does Kuljam Swaroop Mean?

सास्त्रोंमें सबे सुध पाइए, पर सतगुरु बिना क्यों लखाइए ।
सब सास्त्र सबद सीधा कहे, पर ज्यों मेर तिनके आडे रहे ।।५

शास्त्रोंमें परमात्माकी सभी सुधि मिलती है, किन्तु बिना सद्गुरुके उसे किस प्रकार समझा जाए ? सर्वशास्त्रमें परमतत्त्वको समझनेके लिए सीधी और सरल बातें कही हैं परन्तु जिस प्रकार आँखके सामने केवल एक तिनका आ जानेसे पर्वत ढँक जाता है, उसी प्रकार मनमें व्याप्त भ्रान्तियोंसे सत्यज्ञाान छिप जाता है.

The scriptures have all the wisdom to understand the Reality the Supreme Truth but without a true guru how can one understand it. The words of scriptures are actually very straightforward, simple and easy to understand but like a tiny particle in the eyes can prevent a person to see even a huge mountain ahead so does the confusion and wrong perceptions hides the truth.

सो तिनका मिटे सतगुरुके संग, तब पारब्रह्म प्रकासे अखंड ।
सतगुरुजीके चरन पसाए, सबदों बडी मत समझाए।।६

सद्गुरुके समागम द्वारा जब यह भ्रान्तिरूपी तिनका दूर होगा, तभी परब्रह्मका अखण्ड प्रकाश दिखाई देगा. सद्गुरुके चरणोंके प्रताप (कृपा) से ही शास्त्रोंके शब्दोंमें निहित गूढ. रहस्य समझा जा सकता है.

The foreign particle of the eye i.e. the doubts, the confusion in the mind can be easily removed by a true guru and the Absolute, the Whole one that is not divisible, Supreme Lord of the beyond (paar Brahma) will shine upon you. Only with the grace of true Guru the hidden meaning of the words about Reality in scriptures will be revealed to your mind.

तब खोज सबदको लीजे तत्व, तौल देखिए बडी केही मत ।
जासों पाइए प्रानको आधार, सो क्यों सोए गमावे रे गमार ।।

इसलिए हे सज्जन वृन्द ! शास्त्रोंमें र्नििदष्ट वचनोंका मन्थन कर उनके तत्त्वज्ञाानको ग्रहण करो. विवेक पूर्वक तुलनात्मक दृष्टिसे देखो कि बड.ी बुद्धि (महामति) कौन हैं ? जिस मानव देह द्वारा प्राणाधार परमात्माकी प्राप्ति होती है, उसे अज्ञाान निद्रामें सोकर मूढ.ोंकी भाँति क्यों गँवा रहे हो ?

When you go through the scriptures measure with your wise mind(not ego) which one is better and the one that leads you to the Supreme accept that and do not waste your precious opportunity sleeping like an idle idiot.

यामें बडी मतको लीजे सार, सतगुरु याहीं देखावें पार ।
इतहीं वैकुंठ इतहीं सुंन, इतहीं प्रगट पूरन पारब्रह्म।।८

ऐसेमें विवेक बुद्धि द्वारा बड.ी मति वालोंके ज्ञाानका सार ग्रहण करो. सद्गुरु यहीं पर (इसी संसारमें) पूर्णब्रह्म परमात्माके धामका साक्षात्कार कराते हैं. आत्म-जागृति होने पर यहीं वैकुण्ठ तथा शून्यका अनुभव होगा और यहीं पर पूर्णब्रह्म परमात्माका साक्षात्कार भी होगा.

So take the the advice of wise mind of the true Guru and you will be able to see the Baikunth, Vacuum(emptiness) and also the Supreme shall appear before you.

ए वानी गरजत मांझ संसार, खोजी खोज मिटावे अंधार।
मूढमति न जाने विचार, महामत कहे पुकार पुकार।।९

यह तारतम वाणी इस संसारमें गर्जना कर रही है. खोजनेवाले जिज्ञाासु ही खोजकर अपने हृदयके अज्ञाानरूप अन्धकारको दूर करते हैं. इसलिए महामति प्राणनाथजी पुकार-पुकार कर इसका रहस्य स्पष्ट कर रहे हैं. मूढ लोग इसका मूल्य न समझनेके कारण इस विषयमें विचार नहीं करते.

These words of the wisdom are roaring right in the middle of the world but only the seekers search can find it and destroy the darkness of ignorance in the heart. The fool can never understand it and will pay no heed to Mahamati’s persisting call.

All the efforts of Mahamati Prannath is to awaken us, show us the Truth, the Reality hidden under the words of mystics or scriptures. As per Mahamati Prannath only the true seeker (Brahma and Ishwari) can understand what he is talking about for others it is just another jargon of words to create division and conflicts.
श्री किरन्तन प्रकरण ३ चौपाई २४
“Wisdom is the fruit of communion; ignorance the inevitable portion of those who ‘keep themselves to themselves,’ and stand apart, judging, analyzing the things which they have never truly known ” Evelyn UnderHill

खोली इलमें सब किताबें, या कतेब या वेद ।
सब खोले मगज मुसाफ के, माहें छिपे हुते जो भेद ।।६३
इस ब्रह्मज्ञाानने वेद तथा कतेब ग्रन्थोंके गूढ. रहस्योंको स्पष्ट कर दिया जिनमें विभिन्न प्रकारके गूढ. रहस्य भरे हुए थे.

श्री कयामतनामा (छोटा) प्रकरण १

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अक्षर केरी वासना, कह्यां जे पांच रतन।
कागल लाव्यो अमतणो, सुकदेव मुनि धन धन।।८८
अक्षरब्रह्मकी वासनाएँ, जिन्हें पाँच रत्न कह कर सम्बोधित किया गया है, उनमें-से एक शुकदेवजी हैं, जो हमारे घर परमधामका पत्र (श्रीमद्बागवत) लेकर आए हैं, इसलिए वे धन्य हैं.
प्रकरण १२ चौपाई ५०६

तुम वैकुंठ जमपुरी एक कर देखी, तब तो सास्त्र पुरान सब भान्या।
सुकदेव व्यासके वचन बिना, कौन कहे मैं जान्या।। ३
हे ब्रह्मज्ञाानी ! तुम वैकुण्ठ और यमपुरीको एक ही मानकर दोनोंको समान रूपसे देखते हो. यदि ऐसा ही है तो समग्र शास्त्र-पुराणोंके सब सिद्धान्तोंका खण्डन हो गया. परन्तु शुकदेवजी तथा व्यासजीके सिद्धान्तोंको समझे बिना कौन कह सकता है कि मुझे ब्रह्मका परिचय प्राप्त हुआ है ?
यामें बड भागी भए वल्लभाचारज, जाको सुकदेवका गुन भाया।
उतम टीका कीन्हीं दसम की, तो इन ए फल पाया ।। ४
ज्ञाानीजनोंमें सिद्धान्तोंको जानने वाले महान भाग्यशाली श्री वल्लभाचार्यजी हुए. उन्हें शुकदेवजीका सिद्धान्त (प्रेमलक्षणाभक्ति) अच्छा लगा. इसलिए उन्होंने श्रीमद्बागवतके दशम स्कन्धकी उत्तम टीका लिखी है. परिणामस्वरूप उन्हें श्रीकृष्ण तत्त्व प्राप्त हुआ.
बिना पुरान प्रकास न होई, सास्त्र बिना कौन माने।
एक अक्षर को अर्थ न आवे, तो ब्रह्म भरममें आने ।।५
शास्त्रों और पुराणोंके सिद्धान्तोंको समझे बिना ब्रह्मज्ञाानका प्रकाश प्राप्त नहीं हो सकता और शास्त्रोंके प्रमाण बिना मानेगा भी कौन ? जिन्हें शास्त्रोंके सिद्धान्तोंके एक भी अक्षरका गूढ.ार्थ समझमें नहीं आता, वे लोग भ्रममें पड.कर ब्रह्मको मायामें घटाते हैं.
प्रकरण ३२ चौपाई ३९ kirantan

और एक कागद काढिया, सुकदेवजी का सार।
हदियों का कोहेडा, बेहदी समाचार।।९
इस मोह सागरके मन्थनसे पुनः एक साररूपमें शुकदेवजी द्वारा लाया गया पत्र (श्रीमद्बागवत) निकाला. यह भागवत ग्रन्थ संसारी (अज्ञाानी) प्राणियोंके लिए एक उलझन रूप पहेली है, किन्तु ब्रह्ममुनियों (बेहदी) का यह समाचार है.
prakaran 19 kalash hindustani
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Hindi translation is from Shri 108 Krishnamani Maharaj ,Shri 5 Navtanpuri Dham, Jamnagar.