हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

Mahamati Prannath on the true Guru (sadguru)


देत देखाई बाहेर भीतर, ना भीतर बाहेर भी नाहीं।
गुरु प्रसादे अंतर पेख्या, सो सोभा वरनी न जाई।।८

ब्रह्माण्डमें चौदह लोकोंके अन्दर एवं बाहर जितने भी दृश्यमान पदार्थ हैं, उनमें परमात्मा नहीं है (मात्र परमात्माकी सत्ता है). सद्गुरुकी असीम कृपा द्वारा अन्तरमें उनके दर्शन हुए उनकी यह शोभा अवर्णनीय है.

I could not see the Lord inside or outside of the physical world. But by the grace of satguru, I could witness Him inside the self. I cannot describe in words the splendour and the joy.

सतगुरु सोई मिले जब सांचा, तब सिंध बिंद परचावे ।
प्रगट प्रकास करे पारब्रह्मसों, तब बिंद अनेक उडावे ।।९

ऐसे सच्चे सद्गुरु जब मिल जाते हैं, तब वे सिन्धुरूपी पूर्णब्रह्म परमात्मा और बिन्दुरूपी झूठी मायाकी पहचान करा देते हैं और पूर्णब्रह्म परमात्मा का साक्षात् अनुभव (दर्शन) करवाकर बिन्दुरूपी मायाके अनेक प्रपञ्चोंको उड.ा देते हैं.

When one meets the true satguru then you will understand the infinite ocean being- the Lord and finite entity -the illusionary perishable body. He will enable one to experience Lord Almighty supreme and shall destroy lots of ignorance of the world.

महामत कहें बिंद बैठे ही उडया, पाया सागर सुख सिंध ।
अक्षरातीत अखंड घर पाया, ए निध पूरव सनमंध।।१०

महामति कहते हैं, सद्गुरुकी कृपा द्वारा अनायास (सहज) ही बिन्दुरूपी झूठी मायाके प्रपञ्च दूर हो गए हैं और सिन्धुरूप पूर्णब्रह्म परमात्माका अपार सुख प्राप्त हो गया. पूर्णब्रह्म परमात्मा अक्षरातीतके अखण्ड घर-परमधामकी प्राप्ति हो गई. यह अखण्ड निधि पूर्व सम्बन्धके कारण ही प्राप्त हुई.

Mahamati (the great mind) says by the Grace of satguru, the infinitisimally small worldly entity is lost and ocean of eternal bliss of the infinite is gained. I have found the Aksharateet Akhand (whole eternal infinte which is beyond the imperishable Akshar) abode and also have established the original relationship with the Lord.

श्री किरन्तन प्रकरण २ चौपाई

साधो या जुगकी ए बुध।
दुनियां मोह मदकी छाकी, चली जात बेसुध।।१

हे साधुजन ! इस युगकी बुद्धि ही ऐसी तुच्छ हो गई है कि लोग मोह (स्वार्थ) और मद (अभिमान) में मस्त होकर बेसुध बने हुए चले जाते हैं.

O Seekers. Behold the mind of this era. The world is intoxicated by the attachment , pride (me,myself,mine) they are going towards unconsciousness.

दुनी दुनीपें चाहे दुनियां, ताथें करामात ढूंढे।
पीछे दोऊ बराबर संगी, तब दे सिछा और मूडे।।२

संसारके लोग इस झूठे विश्वमें सांसारिक झूठी वस्तुको ही प्राप्त करना चाहते हैं. इसलिए वे चमत्कारी गुरुओंको ढूँढ.ते हैं. फिर ऐसे गुरु और शिष्य दोनों एक जैसे ही हो जाएँगे और एक-दूसरेको शिक्षा देते हुए दूसरोंको अपनी ओर मोड.ने लगेंगे.

The worldly people are always attracted towards the physical or materialistic pleasures to fulfill their they are looking for some Guru who can do some type of magic or miracles. Later, they both become one and try to attract other people towards them. The Guru who guides one to believe in miracles and magic distracts the seekers from the real goal of life. The materialistic and sensuous desires can never be fulfilled but hurts the pursuer in the end.

साधो केहेर कही करामात, ए दुनियां तित रांचे।
झूठी द्रष्टि जो बांधी झूठसों, ताथें दिल ना लगत क्योंए सांचे ।।३

इसलिए हे साधुजन ! महापुरुषोंने चमत्कारको कहर (साधना मार्गमें भयंकर आपत्ति) माना है. किन्तु संसारके लोग उसके प्रति आर्किषत होकर उसी झूठे भ्रममें डूबे रहते हैं. लोगोंकी दृष्टि झूठे चमत्कारोंके भ्रममें फँस गई है. इसलिए सत्यज्ञाानके प्रति उनका मन नहीं लगता.

The wise saints have said the miracles and black magics are the greatest distraction in the path of devotion or in penance. But the world is attracted towards this magical illusions and hence their heart cannot be set on the truth.

कौन मैं कहाको कहाथें बिछुरयो, कौन भोम ए छल ।
गुरु सिष्य ग्यान कथें पंथ पैंडे, पर एती न काहूं अकल ।।४

मैं कौन हूँ, मेरा मूल घर कहाँ है, मैं कहाँसे विछुड.कर यहाँ आया हूँ और यह भुलवनीकी भूमि कौन-सी है ? विभिन्न सम्प्रदायोंके ऐसे गुरु-शिष्य दोनों ही ज्ञाान चर्चा करते हैं, किन्तु इन मूल प्रश्नोंका ज्ञाान प्राप्त करनेकी बुद्धि उनमें नहीं होती.

Who am I , Why I am separated from my original abode and what is this world of illusion ? The guru and disciples of various cults and sects discuss the above queries at length but their mind cannot conceive the answer.

या घरमें या वनमें रहे, पर कहा करे बिना सतगुर ।
तोलों मकसूद क्यों कर होवे, जोलों पाइए ना अखंड घर ।।५

चाहे गृहस्थ बनकर घरमें रहें अथवा सन्यासी बनकर वनमें जाकर तप करें परन्तु सद्गुरुके बिना वे सत्यमार्गका दर्शन नहीं कर सकते. जब तक सद्गुरुके द्वारा अखण्ड घरकी प्राप्ति नहीं होती, तब तक मनुष्य जीवनका उद्देश्य कैसे पूर्ण हो सकता है ?

Whether one choses to live in home as a householder or as an ascetic in the woods but without a true Guru(one who eliminates the darkness of ignorance with the knowledge of Supreme Truth) what possibly one can achieve? Unless one finds the eternal absolute abode, the purpose of human birth is not achieved. Mahamati suggests that one must try to find the true Guru who can guide one to the truth,bliss,eternal abode and the beloved Lord.

सतगुरु सोई जो वतन बतावे, मोह माया और आप ।
पार पुरुष जो परखावे, महामत तासों कीजे मिलाप।।६

सद्गुरु वही है जो मूलघर परमधामकी वास्तविकताका ज्ञाान दे एवं मोह-माया तथा आत्माका परिचय करवा कर क्षर, अक्षरसे परे पूर्णब्रह्म परमात्माकी पहचान करा दे. महामति कहते हैं, ऐसे सद्गुरुसे मिलाप करना चाहिए.

And now, who is the True Satguru and how to recognize him.

The true guru can give you the definite answers of all the queries of life. Who you are, where is your eternal abode, why are we in this physical world of attachment and illusion. He will remind the soul of the beloved Lord who is beyond the Creator imperishable Akshar Brahma. Mahamati suggests try to accept such a true Guru.
श्री किरन्तन प्रकरण २० चौपाई २४४

सतगुरु सोई जो आप चिन्हावें, माया धनी और घर ।
सब चीन्ह परे आखर की, ज्यों भूलिए नहीं अवसर ।।११

वे ही सद्गुरु कहलाते हैं जो आत्माकी पहचान करवा दें, मायाकी सूझ देकर आत्माके स्वामी (धनी) परमात्मा तथा परमधामकी पहचान भी करवा दें. ऐसे सद्गुरुके मिलने पर आत्म-जागृतिका मार्ग प्रशस्त होगा. इसलिए ऐसे अवसरको हाथसे जाने मत दो.

The true guru is the one who can help realize the self and make one understand the maya –physical world of attachment and illusion,the beloved Lord and the supreme abode also the one who can explain the knowledge of the beyond ultimately leading to the Supreme Abode. Do not let go such an opportunity from you prays Mahamati.

ए पेहेचाने सुख उपजे, सनमंध धनी अंकूर।
महामत सो गुरु कीजिए, जो यों बरसावे नूर।।१२

इस प्रकारकी पहचान होने पर आत्माको अखण्ड सुखका अनुभव होता है और अपने धनीके साथ मूल सम्बन्धकी भी पहचान होती है. महामति कहते हैं, इस प्रकार जो अखण्ड ज्ञाानके तेजकी वर्षा करते हैं, ऐसे व्यक्तिको ही अपना सद्गुरु बनाना चाहिए.

When one realizes the self and recollects the original relationship with the beloved Lord, such recognition creates the happiness and bliss. Mahamati says choose such a Guru who can shower such illumination upon you.

श्री किरन्तन प्रकरण १४ चौपाई १६१

सतगुरु साधो वाको कहिए, जो अगमकी देवे गम।
हद बेहद सब समझावे, भांने मनको भरम।।१२

हे साधुजन ! वास्तवमें सद्गुरु वही कहलाता है जो अगम्य परमात्माका वास्तविक परिचय करा दे तथा हद-सीमित (क्षर ब्रह्माण्ड) और बेहद-असीम अविनाशी भूमिकाका सम्पूर्ण ज्ञान करवाकर मनके सभी संशयोंको मिटा दे.
O seeker! The true guru is the one who makes you realize that which cannot be known that which mind cannot conceive. He will explain you the perishable universe and the beyond that is imperishable, eternal and timeless. He will clear all the confusion in your mind.

श्री किरन्तन प्रकरण ४ चौपाई ३

सतगुरु सोई जो वतन बतावे, मोह माया और आप ।
पार पुरुष जो परखावे, महामत तासों कीजे मिलाप।।६

सद्गुरु वही है जो मूलघर परमधामकी वास्तविकताका ज्ञाान दे एवं मोह-माया तथा आत्माका परिचय करवा कर क्षर, अक्षरसे परे पूर्णब्रह्म परमात्माकी पहचान करा दे. महामति कहते हैं, ऐसे सद्गुरुसे मिलाप करना चाहिए.
प्रकरण २० चौपाई २४४
And now, who is the True Satguru and how to recognize him.

The true guru is the one who can give you the definite answer of your eternal abode, the darkness of the world and also your self. You will be at peace. You will have knowledge without confusion. You will have love towards all creation. You will achieve the self realization. Living in this physical plane you will also be able to experience the beyond. You will unite with the Lord. You will hit the ultimate goal of the soul.
If the Guru speaks against others, tells you to disrespect somebody else, judges, analyzes, finds differences, engages in arguments, speaks against the scriptures then understand that is not the true Guru. Without waking yourself up how can you be incharge of waking others’s up. Without knowing the Self within how can you speak about the Supreme for sure?
for Eg. in our Nijnaam there are 6 chaupai... The importance is given to awaken you then the true guru will ask you to repeat in the heart of your heart ceaselessly the 16 lettered mantra otherwise he will ask you to catch more people and only then you are the member of the paramdham!

If your mind is set to gather more people rather on Lord then remember its time to take a U turn.
If you are a seeker of truth keep asking yourself whether you are in right path or not. Have you ever have spiritual experience? Are you achieving your spiritual goal? Sometimes by God’s grace you will be suggested the truth.

koti koti prem pranam

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Hindi translation is from Shri 108 Krishnamani Maharaj ,Shri 5 Navtanpuri Dham, Jamnagar.