हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

कठिन निपट विकट घाटी प्रेमकी

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कठिन निपट विकट घाटी प्रेमकी,
त्रबंक बंकों सूरों किनों न अगमाए।
धार तरवार पर सचर सिनगार कर,
सामी अंग सांगा रोम रोम भराए।।२

प्रेमका मार्ग निश्चय ही बड.ा विकट तथा कठिन है. इस मार्गमें कर्म, उपासना और ज्ञाानके तीन मोड. हैं. इस लिए बडे.-बडे. ...शूरवीरों (तपस्वी, ज्ञाानी) द्वारा भी इस मार्ग पर चला नहीं जाता. तलवारकी धारके समान तीक्ष्ण इस मार्ग पर शील, सन्तोष, धैर्य, क्षमा, दयारूपी शृङ्गार (कवच) धारण कर प्रवेश करो. सामनेसे शरीरके रोम रोमको बींधने वाले (निन्दा, उपालम्भके वचनरूपी) तीक्ष्ण नोंकवाले भाले भी चुभते हैं.

अरस मिसाल कोई है नहीं, तौल देखो तुम इत


अखंड आराम सबमें, चल विचल इत नाहिं।
सब सुख हैं अरस में, रहें याद हक के माहिं ।।१7 प्रकरण २७ परिक्रमा

यहाँ पर सर्वत्र अखण्ड आनन्द है. यहाँ लेश मात्र भी अस्थिरता नहीं है. इस दिव्य भूमिमें सब प्रकारके सुख विद्यमान है. यहाँकी सभी वस्तुएँ श्रीराजजीका स्मरण करतीं हैं.

Dutiful Brave Chhatrasaal

India's first President Dr. Rajendra Prasad's expression on
Dutiful Brave Chhatrasaal
During unveiling Maharaja Chhatrasaal's statue at Panna on January 28 1951
To establish the reminiscence of maker of India's proud history in the form of statue today's function is organized.

Divine Intelligence

निज बुध भेली नूर में, आग्या मिने अंकूर।
दया सागर जोस का, किन रहे न पकरयो पूर।।१
तारतमका प्रकाश और अक्षरब्रह्मकी मूलबुद्धि एकाकार होकर श्री धनीजीकी आज्ञाासे इन्द्रावतीके हृदयमें अङ्कुरित हुई. अक्षरातीत ब्रह्मके आवेशके साथ अवतीर्ण दयाके सागरका प्रवाह किसीसे भी पकड.ा नहीं जा सकता.

Serving only the Master!

I have a choice whether to serve Him or not.

kaliyug

The soul is the driver of the body but it cannot be detected in the body that is why it is called beyond the body, it cannot be seen that is why it is called beyond the senses but it is the one who experiences the joy and sorrow. The joy and sorrow is caused by the attachment, ego and mind. This is not physical attachments but the emotional ones. The physical ones are called pain and pleasures which comes through body senses.

how to influence

Prepare
Why you want your friend to change his view regarding God? Is it that you are uncomfortable that your friend is atheist where as you are not. Then try to understand your own standing or view point. Why do you believe in God? How important it is for you? How it has helped you? Why you cannot accept that your friend must stay an atheist? Also understand whether you are doing all this to comfort yourself or for your friend's best interest. You can do little on others if it is for your own self.

सो सब खातर सोहागनी, तूं अरथ करसी अब !

एह विध मोहे तुम दई, अपनी अंगना जान।
परदा बीच टालने, ताथें विरहा परवान।।१२

हे मेरे प्रियतम धनी ! इस प्रकार आपने मुझे अपनी प्यारी अङ्गना जानकर अपना विरह दिया. निश्चय ही हमारे बीच पड.े हुए मायाके आवरणको हटानेके लिए ही आपने अपना विरह दिया है.
प्रकरण ५ कलश हिंदी

Can Dream and Reality unite?


लेहेरी सुख सागर की, लेसी रूहें अरस।
याके सरूप याको देखसी, जो हैं अरस परस।।१

परमधामकी ब्रह्मात्माएँ ही इन विशाल सागरोंकी सुखमयी तरङ्गोंके आनन्दका अनुभव कर सकतीं हैं. ये ही आत्माएँ अपने मूल स्वरूप (पर-आत्मा) को देख सकेंगी क्योंकि उनका पारस्परिक सम्बन्ध है.

ए जो सरूप सुपन के, असल नजर बीच इन।
वह देखें हमको ख्वाब में, जो असल हमारे तन।।२

ब्रह्मात्माओंके इस स्वप्नके स्वरूप पर भी सदैव परमधामके अखण्ड स्वरूप (पर-आत्म) की दृष्टि बनी रहती है. क्योंकि हमारी पर आत्मा इस नश्वर शरीरको स्वप्नमें देख रही है.

gyaani vs premi

Spiritual knowledge can be summed up but not spiritual experiences!

Evolution

Religious view Vs Scientific view regarding origin of life

river purification

जल पीने योग्य बना देवें, इस तरह से निश्चय कर पाया ;
धो करके अंगूठा पाँव का, उस नदीमें है तब डलवाया
चरणामृत नदीमें पड़ते ही, सब जहर नदीका दूर हुआ
विषकी नदिया अमृत किन्ही, सुख सबन पहुँचाया
ये भी तो दूजा लीला है, श्री कृष्णजी प्राण प्यारे की
ब्रजमें जमुना जहरीली थी, उसका भी जहर उतरेजी ;
निजानंद सागर

याद करो खिलवत सुकन

This world is dream of creator. This universe itself is temporary and perishable and the body we have is temporary and perishable too. He gave us free will on how to live. We can choose wisdom, love, respect, harmony, unity or otherwise! Life is not about destiny or fate but the choices we make.
एक खुदा हक महंमद, हर जातें पूजें धर नाऊं।

सो दुनियां में या बिना, कोई नहीं कित काहूं।।२०

Beshak Ilam

Tartam gyaan is that wisdom which sails the soul out of the ocean of ignorance and enlightens it, it has eliminated all the confusions and ends all the doubts, those who feel it has kept some secret so someone else will come to reveal are cheating the world. All scriptures are revealed by Supreme Lord Himself.

सो ए इलम जब हक का, देत अरस की याद।
तुमें बेसक गुजरे हाल की, क्यों न आवे कायम स्वाद।।६६

जब यह ब्रह्मज्ञाान (तारतम) परमधामका स्मरण कराता है तब तुम्हें परमधामकी अतीतकी घड.ीका स्वाद (अखण्ड सुखोंका अनुभव) क्यों नहीं आता है ?

Shyam hee Shyam

sundar Beautiful Shri Krishna Shyam,
anant infinite Shri Krishna Shyam,
akhand indivisible Shri Krishna Shyam,
anadi beginningless Shri Krishna Shyam,
Arash Ajim Paramdham Shri Krishna Shyam,
Tartam NoorNaam Shri Krishna Shyam,
sanatan eternal Shri Krishna Shyam,
satchidanand truth consciousness bliss Shri Krishna Shyam,
paramatma ultimate soul Shri Krishna Shyam,
aksharateet-beyond of Akshar Shri Krishna Shyam,
mehar Grace Shri Krishna Shyam,
Prem Love Shri Krishna Shyam,

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