सही नाम दियो मोहोर अपनी

मोहे अपनों सब दियो, रही न कोई सक। सही नाम दियो मोहोर अपनी, कर रोसन थापी हक ।। १८ प्रकरण ६१ श्री किरन्तन महामति प्राणनाथ वाणी चिंतन और मंथन हे धनी ! आपने अपनी सारी विशेषताएँ मुझे प्रदान कीं, इसमें कोई सन्देह नहीं रहा. इतना ही नहीं, आपने तो अपने नामकी सही और सिक्का प्रदान कर परमात्माके रूपमें प्रकाशित किया.

Photos: