खबरदार! डरते रहें परवरदिगार! महामति प्राणनाथ वाणी

खबरदार! डरते रहें परवरदिगार! महामति प्राणनाथ वाणी
सो काफर पडे माहें दोजक, आखर को जो ल्यावें सक। जो मोमिन हैं खबरदार, डरते रहें परवरदिगार ।।६ प्रकरण ३ श्री कयामतनामा ग्रन्थ (बडा) ऐसे अविश्वासी लोग नारकीय यातनाओंको भोगते हैं जो (आखर = ईसा आखरी,महंमद मेहेदी आखरी, इमाम आखरी, आखरी किताब श्री कुलजम स्वरुप तारतम सागर) अन्तिम समयमें अवतरित परमात्माके प्रति सन्देह करते हैं. जो ब्रह्मात्माएँ हैं धर्ममें सचेत रहें , परमात्मा से डरती रहें.
The infidels those who have no faith in the last prophets (Isa and Mehadi) will go in dojhak(hell) the ones who doubt the last appearance of Lord. Those who are the celestial souls beware, always have fear of the Lord.

जब हम निजानंद संप्रदाय के सुन्दरसाथ के ह्रदय धाम में श्री कृष्ण श्याम श्यामा बिराजते हैं। इसी लिए इन्हें अरश दिल कहा गया है। सुन्दरसाथ एक दुसरे के हृदये में बैठे श्री कृष्ण को प्रणाम करती हैं और श्री कृष्ण प्रणामी विख्यात हुई। ऐसे अरश दिल सुन्दरसाथ को बार बार रास प्रकाश कलश ग्रन्थ की अवहेलना करते और ताना कसने वालों का सामना करना पड़ता है। प्रकाश ग्रन्थ के प्रमाण को यह काफ़िर मानते ही नहीं हैं।
अरस कह्या दिल मोमिन, दिया अपना इलम सहूर ।
सक ना खिलवत निसबत, ताए काहे न होवे जहूर ।।९०
प्रकरण १४ परिक्रमा
ब्रह्मात्माओंके हृदयको ही परमधाम कहा गया है. स्वयं धामधनीने सद्गुरुके रूपमें आकर मुझे ब्रह्मज्ञाान दिया एवं यह समझ दी. अब मुझे उनके साथका सम्बन्ध तथा मूलमिलावाके विषयमें कोई संदेह नहीं रहा. जिसको यह अमूल्य निधि मिल गई हो उसके हृदयमें ज्ञाानका प्रकाश कैसे नहीं होगा ?
The heart of Momin(soul of Paramdham) is said to be Arash (Paramdham) and granted the Supreme Wisdom of the Self(Shri Krishna) to contemplate. when there is no doubt about the original meeting place moolmilava and the treasures of Paramdham(unity consciousness and love) how can the heart not be enlightened then?

हक तालाने किया फुरमान, डांटत हैं कीने कुफरान ।
अंजीर तौरेत से जो फिरे, सोई काफर हुए खरे ।।३

कुरानके अनुसार खुदाने जो कुछ कहा है अवज्ञााकारी लोग उसे कपट भावसे छिपाते हैं. जो लोग अंजील तथा तौरातसे विमुख होंगे उनको ही विशेष रूपसे अवज्ञााकारी (काफिर) कहा गया है. (इधर परब्रह्म परमात्माके आदेश स्वरूप रास, प्रकाश, कलश आदि ग्रन्थ श्रीप्राणनाथजीके द्वारा अवतरित हुए उनको विहारीजीने कपट भावसे छिपानेका प्रयत्न किया. जो इन ग्रन्थोंसे विमुख होंगे वे ही वास्तवमें नास्तिक कहलाएँगे).
Lord Supreme has sent this message and he is scolding at those who are cynical about Anjir/Toret (Raas, Prakash and Kalash) as Athiest(non-believers). Those who go against these scriptutes are in true sense the non-beleivers.
(Remember there is penalty for non-believing the original truth for me not becoming closer to God itself is severe punishment but some people care less about it for them there is dojhakh!)

काफर दिलमें कीना आने, अंजीर तौरेत पर मारे ताने ।
जो खुदाएका पैगंमर, तिनसे फिरे सो हुए काफर ।।४

ऐसे अवज्ञााकारी लोग हृदयमें कपट भाव रखकर अंजील एवं तौरातके (रास, प्रकाश, कलश ) वचनों पर ताना मारते हैं. परमात्माका सन्देश लेकर आनेवालोंसे जो विमुख होते हैं उनको ही अवज्ञााकारी (काफिर) कहा है.
इस प्रकार हृदयमें कपट भाव होनेके कारण विहारीजी रास, प्रकाश, कलश आदि ग्रन्थोंको देख कर दुःखी हुए और उन्होंने सुन्दरसाथको उन ग्रन्थोंके ज्ञाानसे वञ्चित रखनेका प्रयास किया.

The people who do not have faith in the heart because of their vested interest speak sarcastically about the Angil and toret(Raas, Prakash, Kalash) which are the messages from the Lord but they turn against it and hence they are the infidels.
(Many of Ahuja devotees do this at regular basis!)

जुबां यकीन क्यामत न माने, ऊपर इसलाम के कीना आने ।
उनसे जो हुए मुनकर, सोई गिरो कही काफर।।५

ऐसे लोग मुखसे तो रसूलके प्रति विश्वास करते हैं किन्तु उनके बताए हुए कयामतके सङ्केतोंके प्रकट होने पर विश्वास नहीं करते हैं एवं धर्मके वचनोंके प्रति कपट भाव रखते हैं. जो लोग ऐसे वचनोंसे विमुख होते हैं उनको ही कुरानमें काफिर कहा है.
Every one by the lips say they do believe in the messenger of the Lord (Mahamati Prannath) but in deeds actually they do not, they go against the essence of the religion, such group is called infidel.

मुनकर हुकम और क्यामत, हुए नाहीं नेक बखत ।
फंद माहें हुए गिरफतार, भमर हलाकी पडे कुफार ।।६

जो लोग परमात्माके आदेश एवं कयामतकी घड.ीसे विमुख होते हैं उनके भाग्य कभी नहीं खुले हैं. ऐसे लोग माया-मोहके बन्धनोंमें ही फँसे हुए हैं और भवसागरकी भँवरीमें पड.कर जन्म-मरणरूपी दुःख भोग रहे हैं.
Those who do not believe the command of the Lord and this moment of awakening(Qayamat) it is their misfortune. They will be caught in the noose of the maya and they will end themselves in the world of misery and shall not be out of the cycle of birth and death.
प्रकरण १० श्री कयामतनामा ग्रन्थ (बडा)

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