हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

ranjanaoli's blog

रोसनी पार के पार की, दई साहेब नाम धराए।

रोसनी पार के पार की, दई साहेब नाम धराए।

साहेब तेरी साहेबी भारी।
कौन उठावे तुझ बिन तेरी, सो दै मेरे सिर सारी।।१

हे (सद्गुरु) धनी ! आपकी महिमा अपरम्पार है. आपके बिना यह महान दायित्व कौन संभाल सकता है ? आपने तो यह महान् दायित्व मेरे सिर पर डाल दिया.
O Master, your commands are very difficult. Who can accomplish these herculean task without you and you have thrust it upon my shoulders(head)!

त्रिगुन तिथंकर अवतार, कै फिरस्ते पैगंमर।
तिन सबकी सोभा ले स्याम, आया महंमद पर।।२

उपज्यो सुख संसार में, आए धनी श्री धाम।।

Image: 

कृपानिध सुंदरवर स्याम, भले भले सुंदरवर स्याम।
उपज्यो सुख संसार में, आए धनी श्री धाम।।१
श्री श्यामाजीके वर श्याम-श्रीराजजी कृपाके सागर तथा अत्यन्त सुन्दर हैं. ऐसे धामके धनीके प्रकट होने पर संसारमें अखण्ड सुखका उदय हुआ.
प्रगटे पूरन ब्रह्म सकल में, ब्रह्म सृष्टि सिरदार।
ईस्वरी सृष्टि और जीव की, सब आए करो दीदार।।२
ब्रह्मसृष्टियोंकी शिरोमणि श्यामाजी पूर्णब्रह्मका आवेश लेकर इस संसारमें सद्गुरुके रूपमें पधारी हैं. ईश्वरीसृष्टि एवं जीवसृष्टि सभी आकर उनके दर्शन करें.
नित नए उछव आनंद में, होत किरंतन सार।
वैस्नव जो कोई षट दरसनी, आए इष्ट आचार।।३

सुरत पोहोंची जाए धाम में, मिलाप धनी के संग।।

राग मारु
साथ जी सोभा देखिए, करें कुरबानी आतम।
वार डारों नख सिख लों, ऊपर धाम धनी खसम।।१
लिख्या है फुरमान में, करसी कुरबानी मोमिन।
अग्यारे सै साल का, सो आए पोहोंच्या दिन।।२
देख्या मैं विचार के, हम सिर किया फरज।
बडी बुजरकी मोमिनांे, देखें कौन क्यों देत करज।।३
करी कुरबानी तिन कारने, परख्या सबकी होए।
करे कुरबानी जुदे जुदे, सांच झूठ ए दोए।।४
कस न पाइए कसोटी बिना, रंग देखावे कसोटी।
कची पकी सब पाइए, मत छोटी या मोटी।।५
कसोटी कस देखावहीं, कसनी के बखत।
अबहीं प्रगट होएसी, जुदे झूठ से निकस के सत।।६

धंन धंन सखी मैं किए स्याम संग


धंन धंन सखी मेरे सोई रे दिन, जिन दिन पियाजीसों हुओ रे मिलन ।
धंन धंन सखी मेरे हुई पेहेचान, धंन धंन पीउ पर मैं भई कुरबान ।।१

हे ब्रह्मात्माओ ! जिस दिन सद्गुरु धनीके साथ मेरा मिलाप हुआ, वह दिन धन्य है. वह दिन भी धन्य है जिस दिन मैंने अपने धनीको पहचाना तथा उनपर स्वयंको सर्मिपत कर दिया.
O Souls, the day I united with my beloved is extremely blessed. The moment that I identified my beloved Lord is also very blessed and I am so grateful that I totally surrender myself to beloved Lord.

याद करो हक मोमिनों, खेल में अपना खसम।

मुखकमल मुकट छबि, मंगलाचरन
याद करो हक मोमिनों, खेल में अपना खसम।
हके कौल किया उतरते, अलस्तो बेरबकुंम।।१
तब रूहों बले कह्या, बीच हक खिलवत।
मजकूर किया हकें तुमसों, वह जिन भूलो न्यामत।।२
हुकमें ए कुंजी ल्याया इलम, हुकमें ले आया फुरमान।
दई बडाई रूहों हुकमें, हुकमें दई भिस्त जहान।।३
हुकमें हादी आइया, और हुकमें आए मोमन।
और फुरमान भेज्या इनपें, हकें कुंजी भेजी बैठ वतन।।४
और भी हुकमें ए किया, लिया रूह अल्ला का भेस।
पेहेचान दई सब अरसों की, माहें बैठे दे आवेस।।५
इलम दिया सब अरसों का, कहूं जरा न रही सक।

prem

प्रेम को अंग बरनन
प्रेम देखाऊं तुमको साथजी, जित अपना मूल वतन।
प्रेम धनी को अंग है, कहंू पाइए ना या बिन।।१
प्रेम नाम दुनियां मिने, ब्रह्म सृष्ट ल्याइंर् इत।
ए प्रेम इनों जाहेर किया, ना तो प्रेम दुनी में कित।।२
ए दुनियां पूजे त्रिगुन को, करके परमेस्वर।
सास्त्र अरथ ऐसा लेत हैं, कहे कोई नहीं इन ऊपर।। ३
सुक व्यास कहें भागवत में, प्रेम ना त्रिगुन पास।
प्रेम वसत ब्रह्म सृष्टि में, जो खेले सरूप व्रज रास।।४
तो नवधा से न्यारा कह्या, चौदे भवन में नाहिं।
सो प्रेम कहां से पाइए, जो रेहेत गोपिका माहिं।।५

Let's go Paramdham

चलो चलो रे साथजी, आपन जैए धाम।
मूल वतन धनिएं बताया, जित ब्रह्म सृष्टि स्यामाजी स्याम ।।१

हे सुन्दरसाथजी ! चलो, हम सब साथ मिलकर परमधाम जाएँ. परमधामकी बात सद्गुरुने हमें बताई है, जहाँ ब्रह्मसृष्टि और श्यामाजी सहित श्री श्याम (अक्षरातीत श्रीकृष्णजी) विराजमान हैं.

sanandh

सनंध इमामके स्वाल जवाब की
सुनियो बानी मोमिनों, हुती जो अगम अकथ।
सो वीतक कहूं तुमको, उड जासी गफलत ।।१
All your confusion will be over
हे ब्रह्मात्माओ ! अपने प्रियतम धनीके उन दिव्य वचनोंको सुनो जो आज तक अगम और अकथ कहलाते थे. मैं वह वृत्तान्त कह रहा हूँ जिससे अज्ञाानकी झूठी नींद उड. जाएगी.

हुकम हुआ इमाम का, उदया मूल अंकूर।
कलस होत सबन का, नूर पर नूर सिर नूर।।२

धाम स्याम स्यामाजी साथ, नख सिख रहे भराई।।

मद चढयो महामत भई, देखो ए मस्ताई।
धाम स्याम स्यामाजी साथ, नख सिख रहे भराई।।११

मेरी मस्तीको तो देखो, यह प्रेममद चढ.ने पर मैं महामति कहलाया. अब परमधाम, श्याम-श्यामाजी एवं सुन्दरसाथका स्वरूप मेरे रोम-रोममें अङ्कित हो गया है.

ए लीला अखंड थई, एहनो आगल थासे विस्तार।

सदा लीला जो व्रज की, मैं कही जो याकी विध।
अब कहूं वृन्दावन की, ए तो अति बडी है निध।।६४

व्रज मण्डलमें शाश्वतरूपसे चलनेवाली अखण्ड लीलाका विवरण मैंने इस प्रकार दिया है. अब मैं वृन्दावनकी रासलीलाका संक्षिप्त वर्णन करता हूँ. इसकी शोभा ही अपरिमेय है.

नाम तत्व कह्युं श्रीकृस्नजी, जे रमे अखंड लीला रास

तमे वाणी विचारी न चाल्या रे वैस्नवो, तमे वाणी विचारी नव चाल्या ।
अक्षर एकनो अर्थ न लाध्यो, मद मस्त थईने हाल्या ।।१

हे वैष्णवजन ! तुम वल्लभाचार्यजीकी वाणी-श्रीमद्बागवतकी सुबोधिनी टीकाके गूढ. रहस्योंको समझकर उन पर आचरण नहीं करते. उनके शब्दोंके एक भी अक्षरका अर्थ तुम नहीं समझ पाए, इसलिए झूठी मायामें मस्त होकर चल रहे हो.

सतवाणी वैस्नवने समझावुं, जेसूं मूल डाल प्रकासी।
श्री मुख आचारज जे ओचरया, तेणे जाए भरमणा नासी ।।२

दुनियां देख तूं आप संभार ! Mahamati

रे मन सृष्टि सकल सुपनकी, तूं करे तामें पुकार।
असत सतको ना मिले, तूं छोड आप विकार।।३

हे मन ! संसारकी सम्पूर्ण रचना स्वप्नवत् है, इसमें तू क्यों व्यर्थ पुकार रहा है. (मिथ्या संसारके लोग अखण्ड-सत्य वस्तुको समझ नहीं सकेंगे क्योंकि) असत्य कभी भी सत्यको प्राप्त नहीं कर सकता. इसलिए तू अपने ही विकारोंको त्याग दे.

O mind, do not lose yourself in the world. The people follow wierd rituals and they have very less understanding. They are running after the pleasures that can never be quenched. One cannot be satisfied with the reflection of the happiness. This whole creation is of dream and everything over here is false. The false can never attain the truth so do not go behind this false world but try to free yourself from vikar(false perception, sense pleasure, attachment, anger, greed etc).

Braj and Raas

धन गोकल जमुना त्रट, धन धन ब्रजवासी।
अग्यारे बरस लीला करी, करी अविनासी।।३२

ना जप तप ना ध्यान कछू, ना जोगारंभ कष्ट।
सो देखाई व्रज रास में, एही वतन चाल ब्रह्मसृष्ट।।


ए लीला अखंड थई, एहनो आगल थासे विस्तार।
ए प्रगटया पूरण पार ब्रह्म, महामति तणो आधार।।१०


सतगरु मेरा स्याम जी, मैं अहेनिस चरणें रहूं।
सनमंध मेरा याहीसों, मैं ताथें सदा सुख लहूं ।।


खोजी खोजें बाहेर भीतर, ओ अंतर बैठा आप।
सत सुपने को पारथें पेखे, पर सुपना न देखे साख्यात ।।५

hai nijnaam Shri Krishna

We must first believe this chaupai as truth must have complete faith on it and then one can understand the Nijanand Sampraday.
पिया जो पार के पार हैं, तिन खुद खोले द्वार।
पार दरवाजे तब देखे, जब खोल देखाया पार।।३

जो अक्षरसे भी परे अक्षरातीत परमात्मा हैं उन्होंने ही स्वयं आकर परमधामके द्वार खोल दिए. पारके द्वार मुझे तब प्रत्यक्ष हुए जब उन्होंने इस प्रकार खोलकर दिखाए.
The beloved Lord who is beyond of beyond(Akshar), he Himself (Khud) opened the door. I could see the door of beyond when he opened and showed the door!

खोजी खोजें बाहेर भीतर, ओ अंतर बैठा आप। Lord and the abode is within!

नूर रोसन बल धाम को, सो कोई न जाने हम बिन।
अंदर रोसनी सो जानहीं, जिन सिर धाम वतन।।

परमधामके दिव्य ज्ञानके प्रकाशके सामर्थ्यकी जानकारी हम ब्रह्मात्माओंके अतिरिक्त किसीको नहीं है. जिनको परमधामका दायित्व प्राप्त है, वे ही उसके अन्दरके प्रकाशको जान सकतीं हैं.

No one but the divine celestial souls know the splendour, illumination and power of the supreme abode paramdham. Those who are acquainted with light within, only those can experience the original abode of the supreme and bear the responsibility of Paramdham.

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