हद पार बेहद है, बेहद पार अक्षर,
अक्षर पार अक्षरातीत, जागिये इन घर ॥

Beyond this perishable, timed and limited world exists indestructible, eternal and infinite, abode of Akshar Brahma. Beyond Akshar is Aksharatit, Wake up souls in this home.

ranjanaoli's blog

Cosmic Intelligence

ऐसा समे जान आए बुधजी, कर कोट सूर समसेर ।
सुनते सोर सबद बाननका, होए गए सब जेर।।१

ऐसा समय जानकर बुद्धजी प्रकट हो गए हैं. उनके हाथमें करोड.ों सूर्योंके समान तेजस्वी (अखण्ड ज्ञाानकी) तलवार है. उनके मुखसे निःसृत शब्द वाणोंकी ध्वनीसे भयभीत होकर सभी अत्यचारी पराजित हो गए हैं.
The time of the intelligence has arrive,whose hand carries the sword of light of innumerable (zillions) of sun. The commotion of his words have scared off the mighty bullies and defeated them.
काटे विकार सब असुरों के, उडायो हिरदे को अंधेर ।

Wake up sundarsath!

असतो मा सद्गमय ।

तमसो मा ज्योतिर्गमय ।।

मृत्योर्मामृतं गमय ।

ॐ शांति: शांति: शांति:

Asato maa sad-gamaya

Tamaso maa jyotir-gamaya

Mṛityor-maa-mṛitan gamaya

Om shaantiḥ shaantiḥ shaantiḥ

Lead us from Untruth to Truth, from Darkness to Light, from Death to Immortality. Om peace, peace, peace

kaliyug is over!

kaliyug is over!

सास्त्रें आवरदा कही कलिजुग की, चार लाख बतीस हजार ।
काटे दिन पापें लिख्या मांहें सास्त्रों, सो पाइए अर्थ अंदर के विचार ।।१

शास्त्रोंमें कलियुगकी आयु चार लाख बत्तीस हजार वर्ष मानी गई है. यह भी बताया है कि आयुकी मर्यादा पाप बढ.नेके कारण घट जाएगी. अन्तर्दृष्टिसे विचार करने पर उसका रहस्य समझमें आ जाएगा.

सोले सै लगे रे साका सालिबाहनका, संवत सत्रह सै पैंतीस ।
बैठा ने साका विजिया अभिनन्दका, यों कहे सास्त्र और जोतीस ।।१८

The Supreme Truth

दियो जोस खोले दरबार, देखाया सुंन के पार के पार ।
ब्रह्मसृष्टि मिने सुन्दरबाई, ताको धनीजीएं दई बडाई।।
सब सैयों मिने सिरदार, अंग याही के हम सब नार।
श्री धामधनीजी की अरधंग, सब मिल एक सरूप एक अंग ।।

श्रीकृष्णजीने अपना जोश देकर परमधामके द्वार खोल दिए और शून्य निराकारसे परे अक्षर और उससे भी परे परमधामको अपना घर बताया. इस प्रकार ब्रह्मसृष्टियोंमें सुन्दरबाईको धामधनीने बहुत बड.ा महत्त्व दिया. श्रीश्यामाजीके अवतार स्वरूप होनेसे वे सब ब्रह्मात्माओंकी शिरोमणि (सिरदार) हैं. हम सभी आत्माएँ उनकी ही अङ्गस्वरूपा हैं. श्रीश्यामाजी धामधनीजीकी अर्धांगिनी हैं. पूर्णब्रह्म परमात्मा, श्यामाजी एवं समस्त ब्रह्मात्माएँ सब मिलकर एक ही स्वरूप और एक ही अङ्ग हैं.

He also gave the inspiration and opened the doors of the supreme and showed the vacuum, space, the perishable universe, imperishable universe and the beyond. Amongst all the divine soul. Lord has appreciated Sundarbai greatly and she is our leader as Shyama who is the consort of Lord and of whom we are the parts also is united with Sundarbai’s dream body. Although Shri Krishna, Shyamaji and brahma shriti are separately mentioned but all are united and are one.

Toret - Torah - Kalash

देखाई राह तौरेत कुरान, कुफर सबोंका दिया भान ।
ल्याया नहीं जो यकीन, सो जल दोजख आए मिने दीन ।।८

उन्होंने तौरात और कुरानका मार्ग प्रशस्त करते हुए कलश और सनन्ध ग्रन्थके द्वारा उपदेश दिया और सभीके हृदयकी भ्रान्तिको मिटा दिया. जिन्होंने उन पर विश्वास नहीं किया वे नरककी अग्निमें जलकर शुद्ध होकर सत्यधर्ममें प्रविष्ट हुए.
प्रकरण २ श्री कयामतनामा (बडा)

Lord has directed the path of living through Toret(Torah) Kalash and Quran- Sanandh and has given the right consciousness to all. Those who do not believe they will suffer the fire of hell.

Guru Dutt's Pyaasa

ये महलों, ये तख्तो, ये ताजों की दुनियाँ
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनियाँ
ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है

हर एक जिस्म घायल, हर एक रूह प्यासी
निगाहों में उलझन, दिलों में उदासी
ये दुनियाँ हैं या आलम-ए-बदहवासी
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है

जहा एक खिलौना है, इंसान की हस्ती
ये बसती हैं मुर्दा परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से मौत सस्ती
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है

जवानी भटकती हैं बदकार बनकर
जवां जिस्म सजते हैं बाजार बनकर
यहाँ प्यार होता हैं व्यापार बनकर
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है

ये दुनियाँ जहा आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं है
यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है

जला दो इसे, फूंक डालो ये दुनियाँ
मेरे सामने से हटा लो ये दुनियाँ
तुम्हारी हैं तुम ही संभालो ये दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है

जिन सुख पीउजी ना मिले, सो सुख देऊं रे जलाए । Mahamati


दुख रे प्यारो मेरे प्रानको।
सो मैं छोडयो क्योंकर जाए, जो मैं लियो है बुलाए ।। १ ।। टेक ।।

संसारके दुःख मुझे प्राणप्रिय लगते हैं, उन्हें मैं कैसे छोड. सकता हूँ ? उन दुःखोंको तो मैंने ही बुलाया है.
The sorrow is dear to my life. I invite the sorrow in my life, how can I ever let it go!


नींद निगोडी ना उडी, जो गई जीवको खाए।
रात दिन अगनी जले, तब जाए नींद उडाए।।९

यह दुष्ट (निगोडी) नींद टलती नहीं है. यह तो जीव (पूरे जीवन) को ही निगल गई है (पूरा जीवन इसी नींदमें व्यर्थ व्यतीत हो रहा है). जब रात-दिन विरहकी अग्नि जलेगी, तभी यह नींद उड. जाएगी.
This unconsciousness does not perish but eats up the whole life.
When one suffers day and night then this unconsciousness is lifted.

Indrawati unites with Shyam Shri Krishna

Image: 

Indravati unites with Aksharateet Shri Krishna Shyam and gets ready to awaken all other souls.
अवतार तले विस्नु के, विस्नु करे स्याम की सिफत।
इन विध लिख्या वेद में, सो आए स्याम बुधजी इत।।३६

शास्त्रोंमें सभी अवतार भगवान विष्णुके माने गए हैं किन्तु भगवान विष्णु भी श्रीकृष्णजीकी प्रशंसा करते हैं. वेदोंमें किए गए उल्लेखके अनुसार वे ही श्रीकृष्णजी बुद्धजीके रूपमें प्रकट हुए हैं.
Shri Krishna # Vishnu
It is the same Krishna(Shyam) came as nishkalank budhavatar!

लिखी अनेकों बुजरकियां, पैगंमरों के नाम।
ए मुकरर सब महंमदपें, सो महंमद कह्या जो स्याम।।३7

श्री कृष्ण पर हर स्वांस अर्पन

नाम निज का श्री कृष्ण है यह तारतम देने आया हूँ , ओ मेरी श्यामा जगाने आया हूँ
अनादी अक्षरातीत निजधाम है यह जाहेर करने आया हूँ , ओ मेरी श्यामा जगाने आया हूँ
सत्चिदानन्द लक्षण वाले तेरा स्वामी, मै सत्य, चैतन्य और आनंद हूँ , ओ मेरी श्यामा जगाने आया हूँ
तू मेरी सुंदरी है, तेरी आत्मा जगाने आया हूँ , ओ मेरी श्यामा जगाने आया हूँ
तेरे लिए है सत सुख जो है सदा अविनाशी याद दिलाने आया हूँ, ओ मेरी श्यामा जगाने आया हूँ
यह संसार की नहीं तू मेरी अंगना नार यह समझाने आया हूँ , ओ मेरी श्यामा जगाने आया हूँ

असल तन इन दिलसे, एक जरा न तफावत

दिल मोमिन अरस तन बीच में, उन दिल बीच ए दिल।
केहेने को ए दिल है, है अरसै दिल असल।।१४

ब्रह्मात्माओंका हृदय उनके मूल तन पर आत्मामें है. उनके हृदयमें इस नश्वर शरीरका हृदय भी विद्यमान है. वस्तुतः कहने मात्रके लिए ही यह नश्वर शरीरका हृदय है. वास्तविक हृदय तो पर-आत्माके अन्दर ही विद्यमान है.
singaar prakaran 26
ख्वाब वजूद दिल मोमिन, हकें कह्या अरस सोए।
अरस तन मोमिन दिलसे, ए केहेने को हैं दोए।।२४

ब्रह्म आत्माओंके स्वप्नके शरीरके हृदयको श्रीराजजीने अपना परमधाम कहा है. वस्तुतः उनकी पर-आत्मा तथा इस स्वप्नके शरीरका हृदय कहने मात्रके लिए दो हैं, मूलतः एक ही हैं.

Nijananda Sampraday aka Shri Krishna Pranami Dharma

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चौदह लोक को तारने वाला धर्म श्री कृष्ण प्रणामी शुद्ध सनातन धर्म निजानंद संप्रदाय है। यह किसी धर्म का एक शाखा नहीं बल्कि सभी धर्म इसके शाखा हैं। सभी धर्म के ग्रंथो के रहष्य इस में जाहेर हुआ है।
Shri Krishna Pranami Sudh Sanatan Dharma Nijanand Sampraday is truly Universal Spiritual and all religions are its sects and not vice versa!
Pranam means total submission
Dharm means the rightful duty of the soul
Sanatan eternal
Shudh pure

घर घर होत मंथन

घुरसे गोरस हेत में, घर घर होत मंथन।
खेले सब में सांवरो, मिने बाहेर आंगन।।३२

आनन्द उल्लासके साथ प्रत्येक घरमें प्रेमपूर्वक दहीका मन्थन होता है. घरके अन्दर तथा घरके बाहर आँगनमें श्यामसुन्दर श्री कृष्ण, अपने प्रिय मित्र ग्वाल-बालोंके साथ खेला करते हैं.

Whole village is engaged blissfully in churning the curd and the lovely one plays in all, within and outside in the yard.
In Gokul village every house is busy blissfully churning the curd and in this Lord Shri Krishna plays in all, within and without!

Have mercy on sentient beings! Mahamati Prannath

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SB 12.3.36

Read this to end the confusion!

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श्री जी साहेब जी मेहरबान

गिरो बचाई साहेब ने, तले कोहतूर हूद तोफान ।
बेर दूजी किस्ती पर, चढाए उबारी सुभान।।१२
प्रकरण १ छोटा क़यामतनामा
इसी व्रज मण्डलमें इन्द्रकोपके समय श्रीकृष्णजीने ब्रह्मात्माओंको गोवर्धन पर्वतके नीचे सुरक्षित रखा था. इस प्रसङ्गको कुरानमें हूद तूफान कहा गया है. उस समय हूद पैगम्बरने अपने समुदायके लोगोंको कोहतूर पर्वतके नीचे सुरक्षित रखा था. दूसरी बार नूह तूफानके समय भी उन्होंने ही योगमायाकी नावमें चढ़ा कर उन्हें पार किया था.


छिपके साहेब कीजे याद, खासलखास नजीकी स्वाद ।
बडी द्वा माहें छिपके ल्याए, सब गिरोहसों करे छिपाए ।।१
प्रकरण १५ बड़ा क़यामतनामा
परमात्माकी उपासना गुप्त रूपसे करनी चाहिए. श्रेष्ठ आत्माएँ इस प्रकारकी उपासनासे उनकी निकटताका आनन्द प्राप्त करतीं हैं. सद्गुरु श्रीदेवचन्द्रजीने परब्रह्म परमात्मासे जो प्रार्थना की थी उसे उन्होंने ब्रह्मात्माओंके समुदायसे भी गुप्त रखा था.

One must pray to Lord secretly. The supreme souls pray in this manner and tastes the union with the Lord. The Master when prayed to Lord, he would even keep it secret from the other celestial souls.

बंदगी रूहानी और छिपी, जो कही साहेदी हजूर।
ए दोऊ बंदगी मारफत की, बीच तजल्ला नूर।।४२ श्री मारफत सागर

आत्मभावसे तथा गुप्तभावसे की जानेवाली उपासना परब्रह्म परमात्माके सान्निध्यकी कही जाती है. ये दोनों प्रकारकी उपासना आत्म-अनुभव अथवा परमधामकी पूर्ण पहचानकी है.
The souls that are from Paramdham they do not display their devotion and do it secretly and find themselves closer to the Lord.

अंदर आंखें खोलिए, आई है निज निध।।


वरनन करते जिनको, धनी केहेते सोई धाम।
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सेवा सुरत संभारियो, करना एही काम।।३

सद्गुरु धनी श्री देवचन्द्रजी महाराज जिस मूलघरका वर्णन करते थे, वही अपना परमधाम है. इसलिए तुम धनीजीकी सेवा करते हुए अपनी सुरताको परमधामकी ओर केन्द्रित करो, क्योंकि हमें यही कार्य करना है.


स्याम स्यामाजी सुन्दर, देखो करके उलास।
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मनके मनोरथ पूरने, तुम रंग भर कीजो विलास।।५

अपने हृदयमें प्रेम और उल्लास भरकर अपने प्राणाधार श्याम-श्यामाजीके सुन्दर स्वरूपके दर्शन करो और अपने मनोरथोंको पूर्ण करनेके लिए उनके साथ आनन्द-विलास करो.


मंगल गाइए दुलहे के, आयो समे स्यामा वर स्याम।
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नैनों भर भर निरखिए, विलसिए रंग रस काम।।१०

इसलिए अब प्रियतम परमात्माके शुभगुणोंका गायन करो, क्योंकि सुन्दरवर श्याम-श्यामाको मिलनेका समय आ गया है. अब नयन भरकर युगल स्वरूपके दर्शन करो और प्रेमानन्द लेते हुए उनके साथ विलास करो.


धामके मोहोलों सामग्री, माहें सुखकारी कै विध।
अंदर आंखें खोलिए, आई है निज निध।।११

परमधामके महल और मन्दिर विभिन्न प्रकारकी आनन्ददायी सामग्रियोंसे परिपूर्ण हैं. इसलिए अन्तःदृष्टिको खोलकर देखो, वह अखण्ड निधि स्वरूप तारतम ज्ञाान यहाँ आ पहुँचा है.

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